हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ़ विजय सिंघल
मथुरा। गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य के लिए सरकार जहां अरबों रुपये खर्च कर रही है, वहीं जमीनी स्तर पर हकीकत अलग है। ऐसा ही एक मामला जिला महिला चिकित्सालय में सामने आया है, जहां प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया। मजबूरन गर्भवती की घर पर ही डिलीवरी करानी पड़ी। होली गेट स्थित लक्ष्मण गढ़ मोहल्ला निवासी बंटी ने बताया कि बुधवार शाम करीब 5:30 बजे वह अपनी पत्नी सपना को प्रसव पीड़ा होने पर जिला महिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे। उनके साथ भाभी पिंकी और दादी कमलेश भी थीं। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद डॉक्टर ने बिना अल्ट्रासाउंड किए ही कह दिया कि महिला के पेट में बच्चा उल्टा है और ऑपरेशन करना पड़ेगा। इसके लिए डॉक्टर ने सपना को आगरा रेफर करने की बात कही। आरोप है कि डॉक्टर ने 6 से 8 हजार रुपये का खर्च बताया। बंटी का आरोप है कि वह पत्नी को लेकर करीब तीन घंटे तक अस्पताल में बैठे रहे लेकिन डॉक्टर ने भर्ती करने से इनकार कर दिया। आर्थिक तंगी के चलते बंटी अपनी पत्नी को घर ले आए। बंटी के बताया कि रात करीब 10 बजे सपना की तेज प्रसव पीड़ा से हालत बिगड़ने लगी। भाभी पिंकी की मदद से घर पर ही डिलीवरी करानी पड़ी। रात करीब 10:30 बजे सपना ने एक बेटे को जन्म दिया। बृहस्पतिवार को सपना की जेठानी पिंकी नवजात को बीसीजी का टीका लगवाने जिला महिला चिकित्सालय पहुंचीं। वहां उन्होंने डॉक्टर से सवाल किया कि जब बच्चा उल्टा बताया गया तो फिर घर पर सामान्य डिलीवरी कैसे हो गई। इस मामले में पीड़ित परिवार ने 1076 सीएम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई है। डॉ. अनिल कुमार पुरवानी, सीएमएस महिला अस्पताल ने कहा, मामले की जानकारी कर जांच कराई जाएगी। जांच में दोषी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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