हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि जब किसी का सत्कार करना हो तो उसके लिए उमंग चाहिए। जब लेने चलो तब संतोष चाहिए और जब मांगने चलो तो संकोच करना चाहिए। हम सभी भाग्यशाली हैं कि वात्सल्य ग्राम की भूमि, जो ब्रज की भूमि है, भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि है, यह सौभाग्य से भरी हुई है। सौभाग्य संपत्तियों से नहीं साधना से आता है। यह विचार उन्होंने वात्सल्य ग्राम में निशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन शिविर के समापन अवसर पर व्यक्त किए। शिविर में 60 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए गए। साध्वी ने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. श्याम अग्रवाल को अखिल भारतीय वात्सल्य रत्न और ब्रज रत्न से सम्मानित किया। शिविर में डॉ. श्याम के मार्गदर्शन में डॉक्टरों और पैरामेडिकल टीम ने नेत्र रोगियों की आंखों की जांच के साथ उपचार दिया और ऑपरेशन किए। मुख्य अतिथि विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर आलोक कुमार ने कहा कि संघ का स्वयंसेवक कैसा होता है। एक नैष्ठिक हिंदू कैसा होता है। अपने जीवन को सेवा में बदलने वाला, सेवा के लिए अर्पण करने वाला व्यक्तित्व, अपने बड़प्पन से अनजान अपने जीवन में एक साधारण सहज व्यक्ति के रूप में रहना। यह विशेषताएं स्वयंसेवको में झलकती हैं। इससे पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी ऋतम्भरा और मुख्य अतिथि विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आलोक कुमार ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस अवसर पर आचार्य मृदुल कांत शास्त्री, संजय भैया, महंत मोहन शरण, डाॅ. मनोज मोहन शास्त्री, जयकुमार गुप्ता, आनंद वल्लभ गोस्वामी, स्वामी देवानंद, मुकेश खांडेकर, अनिल मिश्रा, साध्वी चैतन्य सिंधु, सतीष गुप्ता, आनंद अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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