हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन में संत प्रेमानंदजी ने ज्योंही तलहटी की रज का स्पर्श किया तो राधा नाम की गूंज से शिलाएं तेजोमय नजर आईं। उन्होंने सोमवार को जहां परिक्रमा को विश्राम दिया, बुधवार को वहीं से परिक्रमा प्रारंभ की। संत प्रेमानंद गोवर्धन पहुंचे, दानघाटी से कुछ दूरी से परिक्रमा प्रारंभ की। श्रद्धालुओं की भीड़ उनका यशोगान करने लगी। जैसे ही लोगों को उनके आने का समाचार मिला, परिक्रमा मार्ग में उनके दर्शनों को भक्त उमड़ पड़े। उनके स्वागत में जिस तरह पुष्पों की वर्षा हुई, श्रद्धा का यह दृश्य भी दर्शनीय हो गया। संत प्रेमानंद जी ने करीब 10:30 बजे सेवाकुंज से
गिरिराजजी की पैदल परिक्रमा प्रारंभ की। राजस्थान बार्डर यानी पूंछरी के प्रारंभ में अपनी परिक्रमा को विश्राम देकर गाड़ी से वृंदावन लौट गए। मार्ग में जहां जहां वे पहुंचे, वहां भजन-कीर्तन की ध्वनि और राधे राधे के जयकारे गूंजते रहे। परिक्रमा के दौरान वे गोविंदकुंड पहुंचे, जहां राधानाम संकीर्तन कर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। यहां वे रोजाना तीन परिक्रमा वाले चेतन बाबा तथा अन्य संतों से मिले। गिरिराजजी की चर्चा करते हुए सभी संत भाव विह्वल नजर आए।
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Author: Vijay Singhal
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