हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। इलाहाबाद हाईकोर्ट में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के पदाधिकारियों ने शपथपत्र दिया कि अब वह इन दुकानों को किराये पर नहीं उठाएंगे। श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में स्थित दुकानें खाली होने के बाद श्रद्धालुओं के हित के लिए इनका प्रयोग किया जाएगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि ट्रायल कोर्ट ने 30 अगस्त 2025 को भी उनके पक्ष में फैसला सुनाया था, लेकिन प्रतिवादियों ने इस निर्णय को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने भी श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के हित में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सभी दुकानों को खाली करने का आदेश दिया है। उन्होंने बताया कि दुकानें खाली होने के बाद वहां पर दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए रैंप और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही कुछ दुकानों को श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए भी विकसित किया जाएगा। ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं उठानी पड़े। दुकानों के अनाधिकृत कब्जे के चलते वहां पर कोई निर्माण कार्य नहीं हो पा रहा था, लेकिन अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह रास्ता साफ कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में दुकानों के कब्जे को लेकर चल रहे 25 साल से विवाद को समाप्त कर दिया है। 1944 में महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के नेतृत्व में श्रीकृष्ण जन्मस्थान के जीर्णोद्धार का काम शुरू हुआ था। 1951 में जुगल किशोर बिड़ला ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट की स्थापना की। 1958 में इसके प्रबंधन के लिए श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान नामक सोसाइटी पंजीकृत कराई। संस्थान ने परिसर के अंदर कुछ दुकानें बनवाकर उन्हें लाइसेंस के आधार पर 11 महीने के लिए अशोक राघव, पद्मा राघव और हरीश राघव को किराये पर दी थी। कोर्ट ने संस्थान को सार्वजनिक धार्मिक और धर्मार्थ संस्थान माना। कहा, संस्थान के संविधान के मुताबिक सचिव और संयुक्त सचिव को संस्थान की तरफ से मुकदमे चलाने का पूरा अधिकार है। कपिल शर्मा के अधिकार पर संस्थान के किसी भी ट्रस्टी या सदस्य ने आपत्ति नहीं की। इसलिए किरायेदार इस आधार पर मुकदमे को चुनौती नहीं दे सकते।
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Author: Vijay Singhal
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