हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बाल अपचारियों को जिंदगी की नई राह दिखाने के लिए उन्हें अभिनय के साथ ही संगीत और नृत्य का भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभिनय से उनका हृदय परिवर्तित होगा तो वहीं संगीत की धुन उनका मन बदलेगी। हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति के आदेश पर राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) और राजकीय बाल गृह शिशु में प्रशिक्षक भी तैनात कर दिए गए हैं। छोटी उम्र में जाने या अंजाने में हुए अपराध से अंधेरी कोठरी में पहुंचने बाल अपचारियों के जीवन में फिर आशा की किरण चमकेगी। इसके तहत 6 से 10 साल तक के बाल अपचारियों को अवसाद से उबारने और नई राह दिखाने के लिए पहल की है। इसके तहत उन्हें अभिनय के साथ ही नृत्य और संगीत की विभिन्न विधाओं से जोड़ा जाएगा। किशोर न्याय समिति के आदेश पर डीएम चंद्रप्रकाश सिंह के निर्देशन में जिला विद्यालय निरीक्षक रवींद्र सिंह और बीएसए रतन कीर्ति ने प्रशिक्षक दिनेश शर्मा और प्रवीन अरोरा को नियुक्त किया है। वर्तमान में राजकीय संप्रेक्षण गृह (किशोर) में 41 और राजकीय बाल गृह शिशु में 26 बाल अपचारी रह रहे हैं, जिन्हें प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू हो गई है। किशोर न्याय समिति का मानना है कि इन बच्चों को केवल कानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित न रखकर, उनके भविष्य को एक सकारात्मक दिशा देना आवश्यक है। इसी मंशा के साथ संगीत और नाटक जैसी रचनात्मक कलाओं को उनके पुनर्वास का माध्यम बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि कला न केवल भावनाओं को व्यक्त करने में सहायक बनेगी, बल्कि आत्मविश्वास को बढ़ाने और अनुशासन को विकसित करने में भी मदद करेगी। साथ ही इसका उद्देश्य केवल उन्हें एक कलाकार बनाने से कहीं अधिक अपराध की दुनिया से छुटकारा दिलाना है। विकास चंद्र, जिला प्रोबेशन अधिकारी ने कहा, बाल अपचारियों को एक नई शुरुआत करने का मौका मिलेगा। वर्तमान में दो प्रशिक्षकों को नियुक्त किया गया है, ये बाल अपचारियों को अभिनय, संगीत व नृत्य सिखाएंगे। आने वाले दिनों में दो और प्रशिक्षकों को नियुक्त किया जाएगा।
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Author: Vijay Singhal
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