हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में माताजी गोशाला में चल रही 9 दिवसीय गोसूक्त आधारित श्रीरामकथा के छठवें दिन कथा प्रवक्ता मोरारी बापू भावविह्वल नजर आए। उन्होंने कहा कि बरसाना की भूमि माधुर्य और प्रेम से सराबोर है। उनकी प्रार्थना है कि राधारानी ऐसी कृपा करें, जिससे हर वर्ष ब्रज की पावन धरा पर कथा करने का अवसर प्राप्त हो। बापू ने कहा कि अयोध्या वैराग्य की भूमि है, काशी विद्या की भूमि है, चित्रकूट प्रेम की भूमि है और ब्रज श्रीराधा-कृष्ण के अनंत माधुर्य और प्रेम का अद्वितीय केंद्र है। यहां आकर कभी रोने का मन होता है तो कभी नृत्य करने का। यदि कुछ न कर सको तो किसी वृक्ष की छांव में बैठकर ऊंची अटारी वाली की चरणरज का अनुभव कर लें। गो महिमा पर प्रकाश डालते हुए बापू ने अथर्ववेद के गो सूक्त का उल्लेख किया। कहा कि गाय ही ऐश्वर्य, संपदा और धन है। जो काय पालता है वह इंद्र के समान हो जाता है। गाय का वध नहीं होना चाहिए और प्रत्येक जीव को गोरस का सेवन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वाणी, स्वर्ग, वेद और शास्त्र गाय है। ब्रज के संरक्षण की चर्चा करते हुए बापू ने संत पद्मश्री रमेश बाबा के प्रयासों की सराहना की। कथा के दौरान उन्होंने माता पार्वती और भगवान शिव के विवाह का प्रसंग सुनाया। इस अवसर पर बनारस के जगद्गुरु सतुआ बाबा महाराज, हित अंबरीष, सत्य मित्रानंद, गायक बनवारी लाल, महेंद्र प्रताप, महेश, मान मंदिर सेवा संस्थान के अध्यक्ष रामजीलाल शास्त्री, कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री, सचिव सुनील सिंह ब्रजदास, माताजी गौशाला के संयोजक राजबाबा आदि मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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