हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बरसाना में श्रीकृष्ण की लीलाभूमि बरसाना को संत-महात्माओं ने सदैव स्वर्ग से भी महान बताया है। यदि पुष्पक विमान भी बरसाना से विदा कराने आए तो भक्त को उसे ठुकरा देना चाहिए, क्योंकि जो माधुर्य और आनंद इस रस इस नगरी की धूल में है, वह देवताओं के लोक में भी दुर्लभ है।
माताजी गोशाला में चल रही नौ दिवसीय श्रीरामकथा में बुधवार को संत मोरारी बापू ने यह विचार रखे। सुंदरकांड का संदर्भ लेते हुए बापू ने कहा कि पुष्पक विमान रावण का था, जिसे भगवान राम ने अयोध्या वापसी का साधन बनाया। बरसाना के प्रसंग में यही विमान अर्थहीन हो जाता है। किशोरीजी का आंगन ही भक्तों के लिए सच्चा वैकुंठ है। बापू ने कहा बरसाना केवल एक नगर नहीं, यह राधारानी का दिव्य आंगन है। यहां के कुंड, गलियां, पर्व सब आत्मा को अद्वितीय शांति और अनिर्वचनीय आनंद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि इस भूमि का महात्म्य किसी भी लोक या धाम से बड़ा है। बापू ने कहा कि सेवा तीन प्रकार की होती है। वित्तजा, तनुजा और मनसा। वित्तजा सेवा गंगा, तनुजा सेवा जमुना और मनसा सेवा सरस्वती के समान हैं। जब ये तीनों एक साथ होती हैं तो सेवा की त्रिवेणी बहती है। गोमाता की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि गोमाता शरीर और चित्त दोनों को पुष्ट करती है। उसके चार चरण चारधाम के प्रतीक हैं। बापू ने कहा कि देह, धन और प्रतिष्ठा को त्यागकर कथा का रसपान करना चाहिए। कथा में जगद्गुरु सतुआ बाबा महाराज, मौनी बाबा, महामंडलेश्वर स्वामी कृष्णानंद, विधायक श्रीकांत शर्मा, रामजीलाल शास्त्री, राधाकांत शास्त्री, सुनील सिंह ब्रजदास, राजबाबा, नरसिंह दास बाबा आदि शामिल हुए।
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