हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद एवं जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रसखान समाधि पर चल रहे सांझी महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को “ब्रज की प्राचीन सांझी कला” पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने विचार व्यक्त करते हुए सांझी संरक्षण में उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के प्रयासों को सराहा।
तीसरे दिन ब्रज की प्राचीन सांझी परंपरा विषयक संगोष्ठी में वक्ता सुश्री मोहिनी कृष्णदासी कथा वाचक ने कहा कि “ब्रज की सांझी कला को बचाने का जो प्रयास उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा किया जा रहा है, वह अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक है।” उन्होंने सांझी पर आधारित कविता भी सुनाई, जिसे उपस्थितजनों ने खूब सराहा।
वृंदावन पब्लिक स्कूल की प्रवक्ता डा अनीता चौधरी ने ब्रज की सांझी कला की परंपरा का इतिहास बताया और उसके संरक्षण के लिए किये जा रहे प्रयास सराहे। गोकुल की पूर्व सभासद सुश्री प्रवीना तिवारी ने गोकुल के बल्लभ संप्रदाय के मंदिरों में सांझी की समृद्ध परंपरा की जानकारी दी। वृंदावन के सांझी कलाकार विश्वजीत ने ब्रज के मंदिरों में सजने वाली सांझी के महत्व और सांझी बनाने के तरीके समझाये।
अन्य वक्ताओं में चित्रकार कमलेश्वर व साहित्यकार श्रीमती निशा रावत ने ने सांझी कला को व्यवसाय से जोड़ने पर बल दिया। दक्ष एजुकेशन संस्था व खजानी सोसायटी की ओर से भी संगोष्ठी प्रतिनिधित्व किया गया। कार्यक्रम का संचालन गीता शोध संस्थान के कोआर्डिनेटर ( शोध ग्रंथागार, प्रशिक्षण, जनसंपर्क व प्रकाशन) चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार ने किया।
ब्रज संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा ने सभी वक्तागण को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। वक्ताओं को जीएलए विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि अनुपम यादव व सुनील शर्मा ने पटुका पहनाकर सम्मानित किया।
संगोष्ठी के उपरांत ओपन एअर थियेटर पर राधाचरण व बिहारीशरण के शानदार भजन हुए। जिला विकास अधिकारी गरिमा खरे ने सभी भजन गायकों को सम्मानित किया। महावन। उत्तर प्रदेश ललित कला अकादमी के सदस्य अनिल सोनी ने सांझी महोत्सव में भाग लेकर चित्रकारों की बनायी सांझी का अवलोकन किया। महोत्सव के अंतर्गत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, तीर्थ यात्री पहुंच रहे हैं। सभी इस कला को जानने की उत्सुकता दिखा रहे हैं। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश शर्मा, रामवीर सिंह यादव ने भी अवलोकन किया
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Author: Vijay Singhal
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