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फरह में कवियों ने शम्भू शिखर ने गुदगुदाया, विष्णु सक्सेना ने प्रेम में डुबोया

ByVijay Singhal

Sep 21, 2025
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। फरह में पं. दीनदयाल स्मृति महोत्सव मेला में कवियों ने भोर की पहली किरण तक काव्यरस की धारा बहाई। वीररस, ओजरस और शृंगार रस के साथ हास्य रस की गंगा में श्रोता पूरी रात डुबकी लगाते रहे। देश प्रेम की रचनाओं को श्रोताओं ने अपना भरपूर दुलार दिया। कवि सम्मेलन का शुभारंभ भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष डाॅ. दिनेश शर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष किशन चौधरी ने किया। कवि सम्मेलन में इटावा से आए गौरव चौहान ने कहा कि भरत वंसी हृदय में शेर सा अभिमान बोलेगा, जवानी की जुबानी पर वही यशगान बोलेगा। कवि सुरेश अलबेला ने कहा मेरा ये जिस्म गर मिट्टी में मिलता है तो मिल जाए, मैं बाजी हार सकता हूं समर्पण कर नहीं सकता। एटा से आईं योगिता चौहान ने कहा इस धरती से उस अम्बर तक घर-घर अलख जगानी है, जान हथेली पर रखकर भी हमको गाय बचानी है। जयपुर से आए कवि अशोक चारण ने पहलगाम हमले को केंद्र बनाकर काव्य पाठ किया। मेरठ से आईं कवियत्री डाॅ. शुभम त्यागी ने सुनाया पुजारन बन गई तेरी मेरा घनश्याम तू बन जा, निरंतर चल रही हूं मैं, मेरा विश्राम तू बन जा। इसके बाद बनारस से आईं डाॅ. विभा सिंह और शिवांगी ने भी छंद और मुक्तक पेश किए। धौलपुर के पदम गौतम ने किसानों की पीड़ा को कविता के माध्यम से प्रस्तुत किया। कवि संयोजक सचिन दीक्षित ने कविता के माध्यम से हिंदुओं की दुर्दशा और जातिवाद को प्रस्तुत किया। मधुबनी, बिहार से आए शंभू शिखर ने हास्य व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाया। कवि सम्मेलन का आकर्षण मुक्तक सम्राट विष्णु सक्सेना ने चुराया। संचालन कर रहे कवि शशीकांत यादव ने श्रोताओं से पूरी रात जमकर तालियां बजवाईं।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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