हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। महिला जिला अस्पताल में अव्यवस्था का आलम यह है कि जहां अस्पताल तो दोपहर 2 बजे तक खुला रहता है, लेकिन खून की जांच के लिए सैंपल लेना दोपहर 12 बजे ही बंद कर दिया जाता है। लैब स्टाफ की इस मनमानी से गर्भवती महिलाएं और बच्चों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है। महिला जिला अस्पताल सुबह आठ बजे खुलता है और दोपहर 2 बजे तक ओपीडी चलती है। यहां इलाज के लिए गर्भवती महिलाओं और बच्चों की संख्या सर्वाधिक रहती है। इलाज के लिए चिकित्सक खून समेत अन्य जांच लिखते हैं, लेकिन मरीज जब जांच के लिए लैब जाता है तो यहां 12 बजे के बाद सैंपल नहीं लिए जाते हैं। इस कारण कई मरीजों को बिना सैंपल दिए ही वापस लौटना पड़ता है। मरीजों को को मात्र सैंपल देने के लिए अगले दिन सुबह जल्दी आना पड़ता है। इसको लेकर मरीज के तीमारदारों और स्टाफ के बीच कई बार नोकझोंक भी हो चुकी है। बावजूद इसके स्टॉफ अपनी मनमानी से बाज नहीं आता। कई तीमारदारों ने इसकी शिकायत महिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अनिल कुमार पुर्वानी से भी की, लेकिन उन्होंने भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। मरीजों की लगातार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के ध्यान न देने और ठोस कदम न उठाने से अस्पताल की सेवाओं पर भी प्रश्नचिन्ह लग रहा है। खासकर उन गर्भवती महिलाओं को परेशानियों का सामना ज्यादा करना पड़ता है जो दूर-दराज से आती हैं। निर्धारित समय के अनुसार वे 2 बजे तक अस्पताल पहुंच जाती हैं और चिकित्सक को दिखा भी लेती हैं, लेकिन लैब में सैंपल न लेने पर उन्हें दूसरे दिन फिर आना पड़ता है। इसके कारण उनके इलाज में भी देरी हो जाती है। यह हाल नवजात बच्चों के इलाज में भी है।
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Author: Vijay Singhal
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