हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। 11 दिन यमुना का विकराल रूप देख मुरझाए बाढ़ पीड़ितों के चेहरे पर मंगलवार की शाम कुछ राहत की उम्मीद दिखाई दी। इसका कारण यमुना के जलस्तर में कमी होने का सिलसिला शुरू होना रहा। 12 घंटे में मात्र 14 सेंटीमीटर यमुना का जलस्तर कम हुआ है। लेकिन, अब भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में हालात भयावह हैं। यमुना का फैलाव इतना हो चुका है कि लोग परेशान हैं। घरों की छतों पर लोग आशियाना बनाए हुए हैं। यमुना की खादर टापू बन चुकी है तो बाजार मार्ग में भी पानी भरा हुआ है। बाढ़ राहत शिविर में रह रहे लोगों को अपने मकानों के गिरने की चिंता परेशान किए है। हालांकि अब धीरे-धीरे यमुना का जलस्तर गिरेगा, लेकिन अभी भी तीन से चार दिन हालात काबू में आने में लगेंगे। पहाड़ी क्षेत्र में भारी वर्षा के कारण ताजेवाला, ओखला व हिंडन बांध से यमुना नदी में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इस पानी से यमुना का जलस्तर लगातार तेजी से बढ़ा। 10 दिन में यमुना नदी ने 1978 के बाद के सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। हाल यह रहा कि यमुना किनारे खादर में पांच फीट तक कई किलोमीटर तक पानी भर गया। ये पूरा क्षेत्र टापू में तब्दील हो गया।यमुना का फैलाव इतना बढ़ा कि मथुरा जोन के यमुना किनारे के सभी घाट डूब गए और पानी स्वामी घाट व बंगाली घाट के बाजार मार्ग पर कई फीट भर गया। इससे आवागमन प्रभावित हो गया। इसके अलावा यमुना के तटवर्ती सभी गांवों में बाढ़ के हालात बन गए। घरों में पानी भरने के कारण हजारों लोगों को बाढ़ राहत शिविर में रखा गया है। यहां प्रशासन एवं समाजसेवी द्वारा राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। सोमवार की सुबह यमुना का जलस्तर खतरा के निशान 166 से बढ़कर 167.67 मीटर तक पहुंच गया था। शाम छह बजे जलस्तर स्थिर हुआ।
