हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन शोध संस्थान द्वारा आयोजित आठ दिवसीय सांझी महोत्सव की कड़ी में मंगलवार को सेवाकुंज स्थित ठाकुर किशोरीरमण मंदिर, बौहरे जी की कुंज में एक विशिष्ट सांझी संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर सांझी रचना, पद गायन तथा ब्रज की सांझी के कला और भाव पक्ष विषय पर संगोष्ठी का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम का शुभारंभ ठाकुर किशोरीरमण के समक्ष भुवनेश पाठक के सांझी पद गायन से हुआ। जिसमें मोहनवल्लभ ने तबले और नीलमाधव ने पखावज पर संगत दी। नव्या एवं आराध्या पालीवाल ने यहां यमुना किनारा है गीत की प्रस्तुति देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आचार्य विभुकृष्ण भट्ट ने कहा कि ब्रज की सांझी परम्परा कला और भाव दोनों धरातलों पर समृद्ध है।आचार्य यदुनन्दन ने पितृ पक्ष में ब्रज में सजी सांझियों की छटा को अद्भुत बताते हुए इसे ब्रज संस्कृति की अनुपम अभिव्यक्ति कहा। आचार्य महेश भारद्वाज ने सांझी की विविधताओं को वैष्णव परम्पराओं की समृद्धि का प्रतीक बताया। आचार्य विजयकिशोर मिश्र ने सांझी की कलात्मक परंपरा और इससे जुड़े कलाविदों पर प्रकाश डाला। महासभा के संरक्षक सुरेशचन्द्र शर्मा एवं गोस्वामी छैल बिहारी सिद्ध ने सांझी को ब्रज की सांस्कृतिक आत्मा बताया। आचार्य पवन पंडित ने इसके भाव पक्ष को अत्यंत समृद्ध बताया। कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन संस्थान के शोध अधिकारी डॉ. राजेश शर्मा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन सेवायत सुमनकान्त पालीवाल ने किया। इस अवसर पर महंत गोविन्द प्रभु, गिरधारीलाल शर्मा, रासबिहारीदास, मनीषा सिंह, नन्दकिशोर अग्रवाल, कृष्ण कुमार मिश्रा एवं गोपनंदन सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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