हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा का बरसाना रविवार को अलौकिक दृश्य का साक्षी बना। जब राधारानी का जन्मोत्सव प्रारम्भ हुआ, तभी आसमान में उमड़े बादलों ने मानो स्वयं बधाई का बिगुल बजा दिया। वर्षा की फुहारें बूंद-बूंद अमृत बनकर बरसीं और राधारानी का अभिषेक करती प्रतीत हुईं। भक्तों ने इस अद्भुत दृश्य को देख हृदय से अनुभव किया कि प्रकृति स्वयं सेविका बन लाड़ो का श्रृंगार कर रही है। सुबह जैसे ही मंदिर के पट खुले, गर्भगृह से प्रस्फुटित अलौकिक प्रकाश ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। उसी क्षण आकाश से झरती बूंदें राधारानी के मस्तक पर अमृत छिड़क रही थीं। सेवायत पंचामृत से अभिषेक कर रहे थे और साथ ही वर्षा का हर कण पंचामृत में घुलकर मानो आकाशीय आहुति दे रहा था। यह दृश्य देखकर भक्तों की आँखों से आँसू बहने लगे, हर कोई कह उठा ‘आज स्वर्ग धरती पर उतर आया है। इन्द्रदेव की कृपा से उमड़े बादलों ने अपनी गर्जना से मंगलध्वनि की। मानो आकाश शंख बजा रहा हो और बूंदें मंजीरा बजा रही हों। बारिश की टपकन और भक्तों के “राधे-राधे” के जयघोष आपस में मिलकर ऐसा संगीत रच रहे थे, जिससे सम्पूर्ण धाम भक्ति रस में डूब गया। बरसाना की गलियों में दूर-दूर से आए भक्त जब इस दिव्य दृश्य के साक्षी बने, तो हर कोई आनंदमग्न हो उठा। महिलाएं मंगलगीत गाने लगीं, संत वेदपाठ में लीन हो गए और बच्चे फुहारों में नाचने लगे। वृद्ध भक्तों ने इसे ईश्वरीय संकेत बताते हुए कहा ‘यह वर्षा कोई साधारण वर्षा नहीं, यह तो राधारानी के जन्म का दिव्य अभिषेक है।
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Author: Vijay Singhal
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