हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के वृंदावन में बिहारजी कॉरिडोर के लिए सर्वे हो रहा है। नगर आयुक्त अनुनय झा की अध्यक्षता में गठित आठ सदस्यीय समिति सर्वे कर रही है। कॉरिडोर के प्रस्तावित क्षेत्र में अब तक 110 भवन चिन्हित किए जा चुके हैं। इससे स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है कि वे अपने मकानों पर स्वामित्व कैसे साबित करें। दरअसल, वर्ष 1863 में श्रीबांकेबिहारी महाराज के लिए मंदिर का निर्माण भरतपुर के राजा रतन सिंह ने हास-परिहास बगीचे में कराया था। इसी बगीचे में मंदिर के आसपास सेवायत गोस्वामी परिवार बस गए। अब बिहारीजी कॉरिडोर प्रक्रिया में इन परिवारों के समक्ष स्वामित्व साबित करना कठिन हो रहा है। अधिकांश के पास स्वामित्व के कागजात नहीं हैं, उनके पास सिर्फ नगर निगम की टैक्स रसीद और बिजली बिल आदि हैं।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हुए हादसे के बाद सुर्खियां बना हुआ है। यहां निरंतर बढ़ते भीड़ के दबाव के कारण शासन ही नहीं प्रशासन भी विचलित है। इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रस्तावित कॉरिडोर की दिशा में काम भी किया जा रहा है। प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए जमीन चिन्हांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया में आसपास के लोगों की नींद उड़ा दी है। जानकारों का कहना है कि श्रीबांकेबिहारी मंदिर की स्थापना 1863 में भरतपुर के राजा ने कराई थी। यह मंदिर भरतपुर राजा के हास-परिहास बगीचे में बनाया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 3600 वर्ग फीट है, जबकि 1200 वर्ग फीट स्थल पर भक्तों को ठाकुर जी के दर्शन का लाभ मिलता है। जानकार कहते हैं कि मंदिर निर्माण के बाद ठाकुर जी की सेवा में लगे गोस्वामीजनों ने इसी बगीचे में अपने घर बना लिए। इस बगीचे में चार कुआं भी हुआ करते थे, जिसमें कुछ अवशेष भी मौजूद हैं। समय के बाद परिवारों की संख्या में इजाफा होने से यह क्षेत्र घनी आबादी के रूप में बदल गया। बताते हैं कि यहां बड़ी संख्या में लोगों के पास अपने मकानों के स्वामित्व के कागजात नहीं है। कॉरिडोर की प्रक्रिया में ऐसे लोगों के पैरों तले जमीन खिसक रही है कि आखिर किस आधार पर वे मुआवजे के हकदार बनेंगे।बिहारीजी कॉरिडोर के प्रस्तावित दायरे में चल रहे चिन्हांकन और मूल्यांकन में गठित टीम कई मानकों का उपयोग कर रही है। इसमें टीम के लिए सबसे बड़ा सहायक नगर निगम का टैक्स रिकॉर्ड बन रहा है। पिछले दिनों हुए गूगल सर्वे से तैयार किए गए रिकॉर्ड के अनुरूप ही अब पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के कर्मी संबंधित भवनों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इसमें देख रहे हैं कि भवन कितना पुराना है। उसका स्वामित्व किसके नाम है।
श्रीबांकेबिहारी मंदिर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर हुए हादसे के बाद सुर्खियां बना हुआ है। यहां निरंतर बढ़ते भीड़ के दबाव के कारण शासन ही नहीं प्रशासन भी विचलित है। इस समस्या का स्थायी समाधान खोजने के लिए हाईकोर्ट के निर्देश पर प्रस्तावित कॉरिडोर की दिशा में काम भी किया जा रहा है। प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए जमीन चिन्हांकन और मूल्यांकन की प्रक्रिया में आसपास के लोगों की नींद उड़ा दी है। जानकारों का कहना है कि श्रीबांकेबिहारी मंदिर की स्थापना 1863 में भरतपुर के राजा ने कराई थी। यह मंदिर भरतपुर राजा के हास-परिहास बगीचे में बनाया गया। इसका कुल क्षेत्रफल 3600 वर्ग फीट है, जबकि 1200 वर्ग फीट स्थल पर भक्तों को ठाकुर जी के दर्शन का लाभ मिलता है। जानकार कहते हैं कि मंदिर निर्माण के बाद ठाकुर जी की सेवा में लगे गोस्वामीजनों ने इसी बगीचे में अपने घर बना लिए। इस बगीचे में चार कुआं भी हुआ करते थे, जिसमें कुछ अवशेष भी मौजूद हैं। समय के बाद परिवारों की संख्या में इजाफा होने से यह क्षेत्र घनी आबादी के रूप में बदल गया। बताते हैं कि यहां बड़ी संख्या में लोगों के पास अपने मकानों के स्वामित्व के कागजात नहीं है। कॉरिडोर की प्रक्रिया में ऐसे लोगों के पैरों तले जमीन खिसक रही है कि आखिर किस आधार पर वे मुआवजे के हकदार बनेंगे।बिहारीजी कॉरिडोर के प्रस्तावित दायरे में चल रहे चिन्हांकन और मूल्यांकन में गठित टीम कई मानकों का उपयोग कर रही है। इसमें टीम के लिए सबसे बड़ा सहायक नगर निगम का टैक्स रिकॉर्ड बन रहा है। पिछले दिनों हुए गूगल सर्वे से तैयार किए गए रिकॉर्ड के अनुरूप ही अब पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग के कर्मी संबंधित भवनों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इसमें देख रहे हैं कि भवन कितना पुराना है। उसका स्वामित्व किसके नाम है।
भवन में रहने वाला परिवार जमीन का स्वामी है या फिर किराएदार हैं। इसमें नगर निगम के राजस्व रिकार्ड में दर्ज वैल्यू उचित है या नहीं। यह दुकान है या फिर मकान आदि देखा जा रहा है। नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि कोर्ट के आदेश के तहत चिन्हांकन और मूल्यांकन के लिए विभिन्न मानकों का उपयोग किया जा रहा है।
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Author: Vijay Singhal
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