वहीं मुस्लिम पक्ष ने दोबारा विचार करने के लिए कोर्ट में आवेदन दाखिल किया है। शाही ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव और वकील तनवीर अहमद ने बताया,”पहले ये समझने की जरूरत है कि ये सर्वे नहीं बल्कि अमीन रिपोर्ट है। ये आदेश मुस्लिम पक्ष को बिना सुने दिया गया। वादी पक्ष का क्या अधिकार है? ये न तो ट्रस्ट के सदस्य हैं, न लैंड ऑनर हैं। इसलिए विधिक प्रक्रिया अपनाते हुए न्यायालय में अपनी बात रखेंगे।”
अब कोर्ट अमीन मंगलवार को कोर्ट से रिपोर्ट लेंगे। इसके बाद मौके पर जाकर शाही ईदगाह की वास्तविक और वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट बनाएंगे। यहां एक मैप भी तैयार होगा। इसके बाद अमीन कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि व शाही ईदगाह मस्जिद विवाद को 190 साल हो गए हैं। नया साल इसके निपटारे को लेकर नई उम्मीदें लाया है, क्योंकि जनवरी में विभिन्न मामलों की सुनवाई (2, 12, 20 और 23 जनवरी) होनी हैं। परिसर के अमीन आख्या (सर्वे/रिपोर्ट) भी 20 जनवरी को कोर्ट में सौंपी जानी है। सर्वे और आपत्ति 2 जनवरी से शुरू होगी।
हिंदू पक्ष की दलीलें; श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के प्रबंध समिति सदस्य गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी और संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी विजय बहादुर सिंह कहते हैं कि इस मसले पर 1832 से 1968 के बीच 9 केस कोर्ट में चले। सभी में हिंदू पक्ष जीता। यहां मंदिर से मस्जिद की ओर दरवाजा और हिंदू प्रतीक चिह्न मौजूद हैं।
मुस्लिम पक्ष के तर्क; शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी के सचिव और वकील तनवीर अहमद कहते हैं कि 2 जनवरी को कोर्ट जैसे ही खुलेगी, हम अमीन सर्वे के खिलाफ स्टे ऑर्डर लेंगे। ईदगाह में कोई हिंदू प्रतीक चिह्न नहीं। ये ईरानी-मुगल कला से बनी है।
