हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के कृषि विश्वविद्यालयों में कार्यान्वयन को लेकर कुलपतियों के 46 वें वार्षिक अधिवेशन को आयोजन किया गया। प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने ऑनलाइन संबोधन में कहा कि भारत में कृषि विश्वविद्यालयों को किसानों की समस्याओं का व्यापक समाधान खोजने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा में भारतीय कृषि विश्वविद्यालय संघ के सहयोग से आयोजित अधिवेशन में राज्यपाल ने कहा कि भारत की राष्ट्रीय कृषि नीति फसल विज्ञान, मत्स्य पालन, पशु चिकित्सा और डेयरी अनुसंधान पर केंद्रित है। कृषि विश्वविद्यालयों के डिग्री प्रोग्राम के लिए अकादमिक क्रेडिट बैंक और बीच में पढ़ाई छोड़ने के विकल्प लाएं। विशिष्ट अतिथि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के डीडीजी (शिक्षा) डॉ. आरसी अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति तकनीकी शिक्षण संस्थानों में व्यापक बदलाव लाएगी। एक ऐसी प्रणाली बनाने का अवसर प्रदान करेगी जो देश को वैश्विक महाशक्ति में बदलने में योगदान देती है। इस शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य सर्वश्रेष्ठ मानव का विकास करना है। जिसके पास तार्किक सोच और कार्य करने की क्षमता, करुणा और सहानुभूति, साहस और अनुकूलन क्षमता, वैज्ञानिक स्वभाव और रचनात्मक कल्पना शक्ति हो।
मुख्य आयोजक विश्वविद्यालय के कु लपति प्रो. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय, किसान और सरकार के बीच तालमेल की जरूरत बताई। इससे विवि के शोध का लाभ किसान को जल्द मिल सके। आयोजन सचिव कु लसचिव प्रो. एके मदान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। अधिवेशन में बिहार एनिमल साइंस विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह, दाऊश्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय के कु लपति डॉ. एनपी दक्षिणकर, गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर के कुलपति डॉ. एमएस चौहान व हॉर्टिकल्चर विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केएम इंद्रेश ने कृषि विवि में नई शिक्षा प्रणाली को सफतापूर्वक लागू करने पर विचार किया। शुभारंभ कुलपतियों ने जल संरक्षण का संदेश देकर किया।
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Author: Vijay Singhal
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