हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज़ चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में ब्रज के मंदिरों में शरद ऋतु में ठाकुर को गर्म भोजन परोसा जाता है। रविवार को ठा. राधावल्लभलाल जू को सर्दी से राहत देने के उद्देश्य से पंचमेवा युक्त खिचड़ी परोसी, तो मंदिर में एक महीने तक चलने वाला खिचड़ी महोत्सव आरंभ हुआ। खिचड़ी महोत्सव पर मंदिर सेवायतों ने पदों का गायन किया। तो सदियों पुरानी परंपरा के साक्षी बने सैकड़ों भक्त आनंदित नजर आए।
श्रीहित हरिवंश महाप्रभु के सेव्य ठा. राधाबल्लभलाल के मंदिर में रविवार की भोर से ही उमंग नजर आई। खिचड़ी उत्सव के पहले दिन दर्शन को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पौष मास शुक्ल पक्ष की द्वितीया से शुरू होने वाला ये खिचड़ी उत्सव मंदिर में एक महीने तक चलेगा। इसमें प्रतिदिन मंगला आरती से पहले ठाकुरजी को गर्म और पंचमेवायुक्त खिचड़ी परोसी गई। मंदिर सेवायत देवकीनंदन गोस्वामी ने बताया, करीब तीन सौ साल पहले हित कमल नयन महाराज ने इस परंपरा की शुरूआत की थी। दिव्य खिचड़ी प्रसाद में काजू, बादाम, अखरोठ, पिस्ता, जायफल, जावित्री, कालीमिर्च और लौंग जैसी गर्म मेवा का प्रयोग किया जाता है। दिव्य प्रसाद में कुलिया, रबड़ी की ठंड में जमी हुई चिपिया, श्रीखंड के रूप में दही स्वाद बढ़ाते हैं। ठा. राधाबल्लभ मंदिर में एक महीने तक चलने वाले इस खिचड़ी महोत्सव में ठाकुरजी हर दिन अलग-अलग रूप में भक्तों को दर्शन देंगे। उत्सव परंपरा के अनुसार, ठाकुरजी किसी दिन मनिहारिन बनकर चूड़ी बेचते दर्शन देते नजर आएंगे। किसी दिन खिलौने बेचते हुए और किसी दिन सांवरिया के भेष में तो कभी इत्र बेचने वाली बनकर भक्तों को दर्शन देंगे। मान्यता है कि ठाकुरजी प्रियाजू को मनाने के लिए इस तरह के भेष बदलते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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