हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। रिश्वत लेने के आरोप में दो माह से जेल में निरुद्ध डीपीआरओ किरन चौधरी को हाईकोर्ट ने जमानत दे दी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ये स्पष्ट कर दिया है कि डीपीआरओ ने स्वयं रिश्वत स्वीकार नहीं की थी। ऐसे में उन्हें झूठे मामले में फंसाए जाने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। साथ ही उनके गर्भवती होने को भी आधार बनाया है। 5 फरवरी से जिला कारागार मेरठ में निरुद्ध मथुरा की डीपीआरओ किरन चौधरी की जमानत पर बृहस्पतिवार को उच्च न्यायालय में जमानत पर सुनवाई है। किरन के अधिवक्ता ने उन्हें झूठे मामले में फंसाने की दलील दी। कहा कि शिकायतकर्ता के विरुद्ध सरकारी धन के गबन की कई शिकायतें मिली थीं, जिनकी जांच चल रही थी। डीपीआरओ ने जांच पूरी कराने के लिए पत्र भेजे थे, इसीलिए शिकायकर्ता ने मनगढ़ंत तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराई। साथ ही यह भी बताया कि उनके खिलाफ रिश्वत लेने का कोई साक्ष्य नहीं है। रिश्वत के पैसे लेने का आरोप सह-आरोपी बिजेंद्र सिंह के खिलाफ है, जिसे रंगे हाथों पकड़ा गया था। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट का हवाला देते हुए 19 सप्ताह का गर्भधारण होने के आधार पर जमानत देने की अपील की। वहीं सरकारी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध किया। बताया कि किरन चौधरी के कहने पर ही सह आरोपी बिजेंद्र सिंह ने रिश्वत ली थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद किए अपने आदेश में कहा कि डीपीआरओ द्वारा कथित रूप से रिश्वत की मांग की कोई तिथि तथा समय नहीं है। आवेदक द्वारा रिश्वत की राशि स्वीकार भी नहीं की गई। रिश्वत की राशि की मांग और स्वीकार करना भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत अपराध की श्रेणी में आने के लिए अनिवार्य शर्त है। शिकायतकर्ता के विरुद्ध सरकारी धन के गबन की शिकायतें थी, जिनकी जांच चल रही थी। ऐसे में डीपीआरओ को झूठे आरोप में फंसाए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। साथ ही किरन चौधरी के गर्भवती होने के तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने जमानत मंजूर कर दी।
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Author: Vijay Singhal
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