हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में आयोजित ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को भगवान रंगनाथ स्वर्ण निर्मित सूर्यप्रभा रथ पर माता गोदा के साथ विराजमान होकर निकले। भक्तों ने उनके स्वागत में नगर में सुंदर रंगोलियां सजाईं। इस दौरान प्रभु के जयकारों से पूरे मंदिर परिसर व नगर गुंजायमान हो उठा।मंदिर की परंपरा के अनुसार रथ मंडप से प्रभु की सवारी मंदिर प्रांगण में स्थित बारहद्वारी पहुंची। यहां महंत गोवर्धन रंगाचार्य के नेतृत्व में दक्षिण भारत से आए विद्वानों ने मंत्रोच्चार के मध्य सस्वर दिव्य पाठ किया। भगवान की कुंभ आरती की गई और नगर भ्रमण के लिए भव्य शोभायात्रा निकाली गई। परंपरागत वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच प्रभु का रथ जब मंदिर से बाहर निकला तो श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। इस अवसर पर उमड़े भक्तों ने पुष्प वर्षा कर और धूप-दीप जलाकर प्रभु का स्वागत किया। नगर भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। वहीं शाम को ठाकुर रंगनाथ भगवान ने रजत निर्मित हंस पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दिए। मंदिर के रघुनाथ स्वामी ने बताया कि भगवान सूर्य ब्रह्मांड को प्रकाश प्रदान करते हैं लेकिन उनकी प्रभा स्वयं नारायण से ही प्राप्त होती है। नारायण ही सवितृ देव के मध्य विराजमान होकर अपनी शक्ति से सूर्य को प्रकाशित करते हैं। इस सवारी के दर्शन मात्र से दृष्टि दोष दूर होता है और भक्तों को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है।
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Author: Vijay Singhal
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