हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) में कूड़ा जलाना प्रतिबंधित है, साथ ही हरे पेड़ों के कटान पर भी रोक है। मथुरा भी टीटीजेड में शामिल है, लेकिन यहां के अधिकारियों को शायद ये याद नहीं है। सोमवार को विकास भवन में न केवल कूड़ा जलाया गया, बल्कि कूड़े से उठने वाली लपटों ने दो हरे पेड़ों को भी चपेट में ले लिया। दोनों पेड़ सुलग रहे हैं, धुएं के गुबार उठ रहे हैं, लेकिन नियमों का पाठ पढ़ाने वाले अफसर अंजान बने हुए हैं।
शासन के नियमों का पालन कराने का जिम्मा जिन अफसरों पर है, उन्हीं की नाक के नीचे नियमों को धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोमवार को विकास भवन में कर्मचारियों ने कूड़े के ढेर में आग लगा दी। सुबह 8 बजे से सुलग रही आग दोपहर तक पूरे ढेर में धधक उठी। धीरे-धीरे आग ने कूड़े के ढेर के पास ही खड़े दो हरे पेड़ों को भी अपनी चपेट में ले लिया। दोनों पेड़ भी सुलगने लगे। पूरे दिन कूड़े का ढेर और ये दोनों पेड़ सुलगते रहे, लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर ही रहे। कहने को तो विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक और जिला पंचायत राज अधिकारी समेत कई अधिकारी बैठते हैं, लेकिन किसी की नजर इस धधकते कूड़े के ढेर पर नहीं गई। बीते माह मंडलायुक्त आगरा की अध्यक्षता में आयोजित टीटीजेड की बैठक में मथुरा के अधिकारियों को भी नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए थे। नियमों का कितना पालन हो रहा है, इसका अंदाजा विकास भवन में जलते कूड़े के ढेर और सुलगते पेड़ों को देखकर लगाया जा सकता है।
शासन के नियमों का पालन कराने का जिम्मा जिन अफसरों पर है, उन्हीं की नाक के नीचे नियमों को धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। सोमवार को विकास भवन में कर्मचारियों ने कूड़े के ढेर में आग लगा दी। सुबह 8 बजे से सुलग रही आग दोपहर तक पूरे ढेर में धधक उठी। धीरे-धीरे आग ने कूड़े के ढेर के पास ही खड़े दो हरे पेड़ों को भी अपनी चपेट में ले लिया। दोनों पेड़ भी सुलगने लगे। पूरे दिन कूड़े का ढेर और ये दोनों पेड़ सुलगते रहे, लेकिन जिम्मेदार इससे बेखबर ही रहे। कहने को तो विकास भवन में मुख्य विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक और जिला पंचायत राज अधिकारी समेत कई अधिकारी बैठते हैं, लेकिन किसी की नजर इस धधकते कूड़े के ढेर पर नहीं गई। बीते माह मंडलायुक्त आगरा की अध्यक्षता में आयोजित टीटीजेड की बैठक में मथुरा के अधिकारियों को भी नियमों का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए थे। नियमों का कितना पालन हो रहा है, इसका अंदाजा विकास भवन में जलते कूड़े के ढेर और सुलगते पेड़ों को देखकर लगाया जा सकता है।
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Author: Vijay Singhal
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