मथुरा। यादव ने संगठन के चुनाव का सियासी भंवर पार कर लिया। 30 साल पुराने संघी होने का उन्हें फायदा मिला। इसके चलते महानगर अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल बाकी चेहरे पीछे छूट गए। नए साल की शुरुआत के साथ भाजपा की चुनाव उत्सव की शुरुआत हुई थी। मथुरा में जिलाध्यक्ष के साथ ही भाजपा महानगर अध्यक्ष पद के लिए सक्रिय कार्यकर्ताओं से आवेदन मांगे गए थे। पुष्पांजलि स्थित भाजपा कार्यालय पर 22 जनवरी को महानगर अध्यक्ष पद के लिए 43 सक्रिय कार्यकर्ताओं ने दावेदारी पेश की थी। इसमें अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग और सवर्ण चेहरे शामिल थे। पिछड़ा वर्ग में निवर्तमान महानगर अध्यक्ष घनश्याम लोधी के अलावा हरिशंकर राजू यादव की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी। वहीं सवर्ण में प्रदीप गोस्वामी व संजय गोविल और अनुसूचित जाति वर्ग से पूर्व महापौर मुकेश आर्यबंधु ने भी दावा पेश किया था। नामांकन के बाद दावेदारों की दौड़ लखनऊ से दिल्ली तक जारी थी। माननीय की चौखट पर भी दावेदारों ने खूब चक्कर लगाए। बावजूद इसके बाद संघ के चक्रव्यूह में वरिष्ठजनों का रसूख धरा का धरा रह गया। पार्टी ने संघ से जुड़े पिछड़ा वर्ग से आने वाले नए चेहरे पर भरोसा जताया। संघ के साथ तीन दशक का सफर तय कर चुके हरिशंकर राजू यादव को भाजपा ने महानगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। संघ से इतना पुराना नाता होने का उन्हें फायदा मिला, जिसके चलते अन्य दावेदार इस दौड़ में पीछे छूट गए। निर्भय पांडेय को मिला स्वच्छ छवि का तोहफा भाजपा ने जिलाध्यक्ष पद के लिए निर्भय पांडेय पर ही फिर से भरोसा जताया है। सूत्रों के अनुसार निर्भय पांडेय को उनकी स्वच्छ छवि का तोहफा पार्टी ने दिया है। बीते डेढ़ साल में जिलाध्यक्ष रहते हुए उनका दाम बेदाग रहा। साथ ही ब्राह्मण चेहरा होने के कारण पार्टी में जातीय संतुलन के लिहाज से भी उनका नाम आगे रहा। यही कारण रहा कि पार्टी ने किसी नए कार्यकर्ता को मौका देने के बजाए निर्भय को ही लंबी पारी खेलने का मौका दिया है।
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Author: Vijay Singhal
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