मथुरा। कोसीकलां के गांव फालैन में प्रह्लाद और होलिका दहन की लीला गांव फालैन में जीवंत हुई। शुभ मुहूर्त पर संजू पंडा पहली बार होलिका के दहकते अंगारों के बीच सकुशल गुजर गए। इसी अग्नि परीक्षा को देने के लिए गांव के संजू पंडा ने एक महीने तक कठिन तप किया था। गांव फालैन में बृहस्पतिवार से शुरू हुए पंडा मेला में शाम ढलते-ढलते आस्था की लहरें हिलोरे भरने लगीं। श्रद्धालु होलिका से संजू पंडा के बच निकलने के उस दुर्लभ चमत्कारिक क्षण को देखने को आतुर थे। शुक्रवार को सुबह करीब चार बजे मंदिर में तप पर बैठे संजू पंडा ने अखंड ज्योति पर हाथ रखकर शीतलता महसूस की। हालांकि उस समय होलिका की लपटों ने चारों ओर खड़े श्रद्धालुओं को काफी पीछे धकेल दिया। लेकिन ज्यों ही संजू पंडा प्रह्लाद की माला को धारण कर निकले भक्त प्रह्लाद के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। प्रह्लाद कुंड में स्नान के बाद चार बजकर 20 मिनट पर संजू पंडा ने धधकती होलिका की ओर दौड़ लगा दी। होलिका के अंगारों पर दस कदम रखकर पंडा होलिका से सकुशल बाहर निकले। मेला आचार्य पंडित भगवान सहाय एवं ग्रामीणों ने उन्हें अपनी गोद में भर लिया। चारों तरफ जय-जयकार के साथ गुलाल उड़ना शुरू हो गया। पंडा ने मंदिर में पहुंच कर पूजा अर्चना की। इस क्षण के हजारों श्रद्धालु गवाह बने।
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Author: Vijay Singhal
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