हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा में दो हजार से अधिक छोटी बड़ी मिठाई की दुकानें हैं। इन पर बनने वाली मिठाइयां कई-कई दिनों तक रखी रहती हैं। जब ग्राहक पहुंचता है तो उसे ताजी मिठाई बताकर उनका विक्रय किया जाता है। शहर की बड़ी दुकानों की अगर बात करें तो यहां भी मिठाइयों के निर्माण तिथि के नाम पर खेल होता है। दरअसल किसी भी मिठाई के उपयोग की एक निर्धारित अवधि होती है। निर्धारित तिथि के बाद मिठाई का सेवन करना हानिकारक साबित हो सकता है। इसीलिए बिक्री के लिए रखीं मिठाइयों पर निर्माण की तिथि और प्रयोग की तिथि डाली जाती है। लेकिन इसमें भी मिठाई विक्रेता खेल कर रहे हैं। वे निर्माण तिथि के स्थान पर तारीख नहीं डालते हैं, बल्कि टुडे यानी आज लिख देते हैं। साथ ही प्रयोग की तिथि पर मिठाई के अनुसार एक दिन, दो दिन या तीन दिन लिखा रहता है। ऐसे में जब भी कोई ग्राहक पहुंचता है तो वह यही समझता है कि मिठाई आज ही बनी है। अगर इसके स्थान पर तारीख डाली जाए तो उसे ये भ्रम न हो। रात 10 बजे के करीब दुकानों की पड़ताल में भी मिठाइयों की दुकानों पर आपको काउंटर मिठाइयों से भरे मिल जाएंगे। जब तक मिठाई बिक नहीं जाती है तब तक कोई भी विक्रेता उसे नहीं हटाता है। दरअसल दुकानदार नियम में ढील का फायदा उठा रहे हैं। सहायक आयुक्त खाद्य द्वितीय धीरेंद्र सिंह ने बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने पहले मिठाइयों पर निर्माण तिथि और प्रयोग तिथि डालना अनिवार्य कर दिया था। लेकिन बाद में विक्रेताओं के विरोध पर विभाग बैकफुट पर आ गया। इसके बाद इस नियम को अनिवार्यता से हटाकर स्वेच्छा तक सीमित कर दिया गया। हालांकि विभाग जब भी जांच करता है और मिठाइयां दूषित या अधिक दिन से रखीं हुईं मिलती हैं तो उसे तत्काल नष्ट करा दिया जाता है।
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Author: Vijay Singhal
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