मथुरा। महावन के रमणरेती स्थित उदासीन कार्ष्णि आश्रम में आयोजित कार्ष्णि गोपाल जयंती महोत्सव में तीसरे दिन कार्यक्रमों की शुरूआत कार्ष्णि कृपाचार्य महाराज के अभिषेक से हुई। इस दौरान सुबह से देर शाम तक आश्रम ठाकुर रमण बिहारी के जयकारों से गुंजायमान रहा। पीठाधीश्वर व कार्ष्णि गुरु शरणानंद महाराज ने सदुपदेश के दौरान कहा कि जीव चौरासी लाख योनियों का भ्रमण करते हुए पुनः मानव जीवन को प्राप्त करता है। मानव जीवन में भी महापुरुषों की संगत नहीं करके वह खुद को दोबारा चौरासी लाख योनियों में भ्रमण करने को तैयार करता है। ऐसे में महापुरुषों की संगत अत्यंत आवश्यक है। इससे जीवन प्रकाशमय हो जाता है। उन्होंने कहा कि कार्ष्णि शब्द कृष्ण से बना है। हम सभी कृष्ण के भक्त हैं इसलिए हम सभी कार्ष्णि हैं। गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि महापुरुषों की संगत हर जीव को भव सागर से पार कर देती है। इसलिए हमेशा संतों की संगत करनी चाहिए। परमानंद महाराज ने कहा ईश्वर की प्राप्ति के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है सत्संग बिना गुरु के नहीं मिलता। कार्यक्रम में ठाकुर हमारे रमण बिहारी हम हैं रमण बिहारी के, अब चाहे हमको बुरा कहे हम हो चुके रमण बिहारी के… आदि भजनों से आश्रम गुंजायमान होता रहा। रात में ठाकुर जी का डोला निकाला गया। जिसमें हरिनाम संकीर्तन के साथ संत व श्रद्धालु आश्रम की परिक्रमा करते रहे। कार्ष्णि हरदेवानंद महाराज, कार्ष्णि दिव्यानंद महाराज, कार्ष्णि गोविंदानंद महाराज, कार्ष्णि नागेंद्र महाराज, दिनेश मिश्र, सुधीर यादव,चंद अरोड़ा आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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Author: Vijay Singhal
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