हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार विभाग में व्याख्या का आयोजन हुआ। इसमें इसरो के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट प्रौद्योगिकी की बारीकियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया गया।
इसरो के वैज्ञानिक प्रो. सुभाष चंद्र वेरा ने सैटेलाइट संचार की उपयोगिता के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इसके जरिये यूजर का फोन मोबाइल टॉवर के बजाय सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हो जाता है। इसके बाद वह किसी भी मोबाइल या टेलीफोन पर फोन कर बात कर सकता है। इसके लिए एक अलग प्रकार का फोन आता है जिसे सैटेलाइट फोन या सेट फोन कहा जाता है। मौजूदा दौर में सैटेलाइट कनेक्टिविटी मिलने के बाद यूजर्स मोबाइल में बिना नेटवर्क के कॉलिंग और इंटरनेट की सुविधा का लाभ उठा पाएंगे। वैज्ञानिक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि शोध के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति बहुत महत्वपूर्ण है। अनुसंधान के प्रस्ताव को अच्छी तरह से और वैज्ञानिक तरीकों से नियोजित किया जाना चाहिए। शोध में टॉपिक का बहुत ही महत्व है। उसी टॉपिक को चुनें जिस पर बैकग्राउंड मैटेरियल उपलब्ध हो। लिटरेचर सर्वे में पूर्व में किए गए कार्यों व नवीनतम जानकारी के साथ-साथ भविष्य में इस कार्य से पड़ने वाले प्रभाव को भी संज्ञान में लेना चाहिए। अनुसंधान ऐसा होना चाहिए जो मानव जीवन की जरूरतों को प्रौद्योगिकी के माध्यम से पूरा कर सके। विभागाध्यक्ष प्रो. विनय कुमार देवलिया, मनीष गुप्ता, आशीष शुक्ला आदि शामिल रहे।
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Author: Vijay Singhal
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