उन्हाेंने बताया कि जिस गाड़ी में रौनक से बरामद हुईं जाली नोट छापने वाली मशीनें आ रहीं थीं वह गाड़ी आगरा के पास खराब हो गई। जिसके चलते सही समय पर बरामद माल थाना जीआरपी नहीं आ सका। उन्होंने बताया कि सिक्योरिटी पेपर भी रौनक खुद तैयार करने लगा था। इसके लिए वाराणसी की श्रीनगर कॉलोनी में इंजीनियर रमेश का मकान किराए पर लिया था। एक 500 रुपये के जाली नोट को तैयार करने में दो डालर का खर्च आता था। रौनक ने बताया कि उसका काफी पैसा सन साइट कंपनी में डूब गया। जिसके चलते उस पर करीब डेढ़ करोड़ का कर्ज हो गया था। उस कर्ज को उतारने के लिए उसने नकली नोटों का अवैध धंधा करना प्रारंभ किया।
मथुरा। जाली नोटों की एक खेप ने इससे जुडे़ अंतरराष्ट्रीय गिरोह का खुलासा कर दिया। मालदा से संचालित होने वाले इस गिरोह के तार बांग्लादेश और पाकिस्तान तक फैले हैं। इसकी भनक लगने पर जीआरपी ने उच्च सुरक्षा एजेंसियों को इसकी जानकारी दी है। जैसे-जैसे जीआरपी गिरोह की तह तक पहुंच रही है उसके सामने पाकिस्तान तक जाली नोटों का कनेक्शन सामने आता जा रहा है। मालदा को जाली नोटों के कारोबार की मंडी कहा जाता है। पिछले तीन सालों में मालदा से लगे बांग्लादेश बॉर्डर पर बीएसएफ ने 100 करोड़ से अधिक के जाली नोट बरामद किए हैं। जीआरपी सूत्रों के अनुसार, मालदा का एक गांव बांग्लादेश के बार्डर से सटा हुआ है। जाली नोटों की खेप यहीं पर आती है। यहां से उसे अंतरराष्ट्रीय गिरोह के माध्यम से विभिन्न स्थानों पर पहुंचाया जाता है। इस गांव में छोटे-छोटे बच्चों को जाली नोटों की गड्डी लाने ले जाने में प्रयोग किया जाता है। यह क्षेत्र रेलवे स्टेशन के काफी नजदीक है जिसके चलते रेल के माध्यम से यह जाली नोट देश के अन्य हिस्सों में जाते हैं। एसपी जीआरपी मोहम्मद मुश्ताक ने बताया कि जीआरपी गिरोह के बांग्लादेश और पाकिस्तान कनेक्शन की छानबीन कर रही है।
