हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भरतपुर के घना और आगरा के सूरसरोवर के बाद अब जोधपुर झाल वेटलैंड भी विदेशी पक्षियों को भा रहा है। पहली बार करीब 6 हजार किमी दूर से 38 रोजी पेलिकन भी यहां पहुंचे हैं। ये पक्षी ज्यादातर अफ्रीका और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों में लाल सागर के किनारे पाए जाते हैं। इनका मनमोहक कलरव और अठखेलियां आकर्षण का केंद्र बन गई हैं। बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ डाॅ. केपी सिंह ने बताया कि भारत में रोजी पेलिकन की तीन प्रजातियां मिलती हैं। इनमें डालमेशन पेलिकन और ग्रेट-व्हाइट पेलिकन ( रोजी पेलिकन ) प्रवासी प्रजातियां हैं, जबकि स्पाॅट-बिल्ड पेलिकन प्रजनक आवासीय प्रजाति है। आगरा के सूरसरोवर और भरतपुर के घना में डालमेशन पेलिकन और ग्रेट-व्हाइट पेलिकन ( रोजी पेलिकन) प्रजातियां सर्दियों के प्रवास के दौरान डेरा डालतीं हैं। रोजी पेलिकन पक्षी वर्ग के परिवार पेलेकेनिडे में वर्गीकृत सबसे बड़े आकार के पक्षी हैं। इसका वैज्ञानिक नाम पेलेकेनस ओनोक्रोटलस है। रोजी पेलिकन मध्य एशिया फ्लाई-वे के अंतर्गत उत्तर पूर्व यूरेशियन क्षेत्र जॉर्जिया, अजरबैजान, कजाकिस्तान, यूक्रेन समेत अफ्रीका और सऊदी अरब के कुछ हिस्सों में लाल सागर में प्रजनन करती हैं। इस क्षेत्र में प्रजनन करने वाली रोजी पेलिकन की जनसंख्या भारत के तराई क्षेत्र के अलावा तुर्कमेनिस्तान, इरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड में सर्दियों के प्रवास पर आतीं हैं। शोधकर्ता निधि यादव बताती हैं कि स्वच्छ पानी की झील पेलिकन का हेविटाट होता है। पेलिकन का मुख्य भोजन मछलियां हैं। जोधपुर झाल वेटलैंड को विकसित करने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। यह वेटलैंड पक्षियों के अनुकूल और पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। इस बार अनेक स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की प्रजातियां यहां देखने को मिलीं हैं। कई प्रजातियां यहां पहली बार पहुंचीं हैं। पिछले दिनों सफेद गिद्ध यहां जोड़े में पहुंचा था, जो विलुप्तप्राय प्रजाति में है। अब रोजी पेलिकन दिखें हैं।
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Author: Vijay Singhal
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