हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर क्षेत्र में विद्यापीठ चौराहा के समीप स्थित 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी लद्दाराम सिंधी धर्मशाला को बेचने का मामला सामने आया है। इस मामले में आगरा के व्यक्ति ने पुलिस प्रशासन द्वारा अनसुनी करने पर न्यायालय के आदेश पर 9 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। आगरा नाई की मंडी निवासी सुधीर कुमार ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि सेठ लद्दाराम ने सन् 1920 में इस सेठ लद्दाराम धर्मशाला का निर्माण कराया था। इसका उद्देश्य कृष्णभक्ति प्रचारार्थ बांकेबिहारी के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालुओं को निशुल्क ठहरने की सुविधा प्रदान करना था। उनके द्वारा बनाए गए सेठ लद्दाराम सिंधी धर्मशाला ट्रस्ट में यह स्पष्ट उल्लेख था कि इस संपत्ति का उपयोग सदैव धर्मार्थ कार्यों के लिए किया जाए। यदि उनके वंशज उनकी इच्छानुसार यह यह कार्य न कर सकें तो वृंदावन नगर पालिका इसे अपने आधिपत्य में लेकर धर्मार्थ उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इसका संचालन करे। पीड़ित ने बताया कि वे और उनके पूर्वज लंबे अर्से से धर्मशाला में आकर ठहरते रहे तथा बांकेबिहारी के दर्शन करने जाते हैं। जब वे 14 सितंबर 2024 को धर्मशाला में पहुंचे तो वहां मौजूद ग्राम डांगौली मांट निवासी महेश चंद्र बघेल ने उन्हें वहां ठहरने से रोक दिया। आग्रह करने पर मारपीट की। उन्हें बताया गया कि यह संपत्ति उनके द्वारा खरीद ली है, जिस पर अब व्यावसायिक कॉम्प्लैक्स बनाया जाएगा। इससे आहत सुधीर कुमार ने 21 सितंबर को एसएसपी से शिकायत की, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई न की तो न्यायालय की शरण ली। एफआईआर में बताया कि सेठ लद्दाराम द्वारा जनहित के लिए इस विरासत का निर्माण किया गया, उसका विक्रय सेठ लद्दाराम के धेवते हरिराम चतरुमल तथा अन्य 7 ट्रस्टियों ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर महेश बघेल को कर दिया है। आरोप है कि सरकार को राजस्व का चूना लगाने के लिए धर्मशाला की विक्रय राशि महज 6 करोड़ 89 लाख 37 हजार दर्शाई गई है। जबकि इसकी बाजार में कीमत 15 करोड़ से अधिक है।कोतवाली प्रभारी रवि त्यागी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जा रही है।
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Author: Vijay Singhal
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