हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। फरह के निकट जोधपुर झाल का संरक्षण उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा किया जा रहा है। इससे जोधपुर झाल में पक्षियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जैव-विविधता का अध्ययन करने वाली संस्था बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह का कहना है कि वैश्विक स्तर पर संरक्षण अभियानों के बाद भी पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों में से 80 प्रतिशत से अधिक की आबादी में गिरावट आ रही है। उनका कहना है आइयूसीएन की संकटग्रस्त सूची में शामिल पक्षियों की 20 से अधिक स्थानीय व प्रवासी प्रजातियों को जोधपुर झाल वेटलैंड पर रिकाॅर्ड किया गया है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश का राज्य पक्षी सारस क्रेन (वल्नरेविल) जोधपुर झाल पर हर साल सारस प्रजनन करता है। इस साल सारस क्रेन के दो जोड़ो ने अपने घोंसले बनाए। डीएफओ रजनीकांत मित्तल ने बताया कि आद्रभूमि पर निर्भर पक्षियों की प्रजातियां बहुत अधिक होती है और वन क्षेत्र की तुलना में वेटलैंड पर अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं। वन विभाग आद्र्रभूमि पर निर्भर पक्षियों के आवास को बचाने के लिए सदैव प्रयासरत रहता है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सीईओ एसबी सिंह ने बताया कि जोधपुर झाल वेटलैंड का संरक्षण बर्ड सेंचुरी की तरह किया जा रहा है। देशी-विदेशी पक्षियों के अनुकूल वाटर बॉडी और घर तैयार किए जा रहे हैं। यहां आने वाले पर्यटकों के लिए भी खास इंतजाम किए जा रहे हैं। ताकि वह पक्षियों की दुनिया को बारीकी से समझ सकें। यह कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरा होने की संभावना है।
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Author: Vijay Singhal
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