हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश लेकर मोती झील स्थित भूरी वाला आश्रम की संपत्ति कुर्क करने पहुंची को देखकर आश्रम का मुख्य द्वार बंद कर लिया गया। स्वामी दर्शनानंद ने आत्मदाह की चेतावनी दे दी। इसी बीच जिला जज के स्टे आर्डर की कॉपी पहुंच गई। ऐसे में पुलिस को बिना कार्रवाई किए ही लौटना पड़ा। दरअसल, भूरी वाला आश्रम पर स्वामित्व को लेकर पिछले काफी समय से विवाद चला आ रहा है।16 नवंबर को सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा आश्रम की कुर्की के आदेश जारी किए थे। शुक्रवार शाम को भूरी वाला आश्रम पर सिटी मजिस्ट्रेट के कुर्की के आदेश के अनुपालन को लेकर सीओ सदर प्रवीण कुमार, वृंदावन कोतवाली प्रभारी विजय कुमार सिंह व अन्य चौकियों की फोर्स मौके पर पहुंची। यह देखकर वहां मौजूद संत-विद्यार्थियों ने आश्रम के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया। पुलिस के समझाने के बाद भी ताला नहीं खोला गया। सीओ सदर ने कटर मशीन मंगाकर ताला काटने की तैयारी कर ली। इसी बीच स्वामी दर्शनानंद ने आत्मदाह की चेतावनी दे डाली। यह देख पुलिस भी सहम गई। इसी बीच पुलिस के मोबाइल पर स्टे आर्डर की कॉपी आ गई। स्टे आर्ड देखने के बाद पुलिस कुर्की कार्रवाई को बीच में छोड़कर चली गई। स्वामी दर्शनानंद ने बताया कि जिला जज सिविल डिवीजन न्यायालय संख्या दो द्वारा स्टे आर्डर दिया गया है। सीओ ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई के लिए पुलिस पहुंची थी। स्टे आर्डर मिलने के बाद कार्रवाई रोक दी गई। वृंदावन। भूरीवाला आश्रम वृंदावन के मोतीझील इलाके में है। इसे 40 साल पहले संत भूमानंद महाराज ने बनवाया था। 2016 में आश्रम के महंत ने वसीयत लिखी, जिसमें स्वामी दर्शनानंद को महंत बनाया गया। 2020 में संत भूमानंद का गोलोक वासी हो गए। इसके बाद आश्रम में प्रकाशानंद और कृष्णानंद से दर्शनानंद के बीच आश्रम के कब्जे को लेकर विवाद शुरू हो गया। 7 अक्तूबर को कुछ लोगों ने लाठी-डंडों और हथियारों से आश्रम पर हमला बोल दिया। इस घटना में दर्शनानंद सहित 9 लोग घायल हो गए थे। दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर आश्रम में कब्जा का आरोप लगाया था।
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Author: Vijay Singhal
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