हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में ठा. बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़ अधिक हो या फिर कम हो। प्रशासन पर व्यवस्था संभाली नहीं जा रही। बुधवार को भक्तों की संख्या सामान्य थी। इसके बाद भी बेरिकेडिंग पर अफरा-तफरी थी। रोज नए प्रयोगों से भी व्यवस्था नहीं संभल रही है। ऐसे में एक बार फिर दर्शन की आनलाइन बुकिंग की व्यवस्था को लेकर आवज उठने लगी है। ठा. बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं को दर्शन सुलभ कराने के लिए शुरू की गई नई व्यवस्था में न तो कतार की व्यवस्था सफल हुई और न ही बेरिकेडिंग की। कोविडकाल की तरह फिर से दर्शन की आनलाइन बुकिंग ही व्यवस्था को ठीक कर सकती है। कोविड काल में सुबह और शाम चार हजार श्रद्धालु दर्शन करते थे। बाद में ये संख्या चालीस हजार पहुंच गई थी। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को वही पुरानी आनलाइन व्यवस्था सुलभ नजर आ रही है। इसमें तय संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने पर न तो व्यवस्था ही बिगड़ेगी और न ही आपाधापी का माहौल होगा। यदि बीस हजार सुबह और बीस हजार श्रद्धालुओं को शाम को दर्शन कराया जाए, तो आपाधापी से काफी राहत मिलेगी। वीकेंड या विशेष पर्व पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।
ठा. बांकेबिहारी मंदिर में सामान्य दिनों में तीस से चालीस हजार श्रद्धालु दर्शन को आ रहे हैं। वीकेंड और पर्व के दिनों में ये आंकड़ा एक से डेेढ़ लाख के बीच हो जाता है। ऐसे में आम दिनों में आनलाइन बुकिंग कराकर आने वाले करीब चालीस हजार श्रद्धालु बड़े ही इत्मिनान के साथ आराध्य के दर्शन बिना बेरिकेडिंग पर रोके कर सकते हैं। जैसे कि लाकडाउन के दौरान सुबह 20 हजार और शाम को 20 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। लाकडाउन के बाद जब मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खुले तो प्रारंभ में सुबह दो हजार और शाम को दो हजार श्रद्धालुओं की तय की गई थी। लेकिन, बाद में इसमें बढ़ोतरी होती रही और सुबह और शाम बीस-बीस हजार श्रद्धालुओं ने बुकिंग कराकर दर्शन किए थे।
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Author: Vijay Singhal
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