हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता गन्ना मिल को कैग ने अनुपयोगी करार दिया है। इस मिल की मुश्किलें खत्म नहीं हो रहीं हैं। गन्ना मिल के लिए डाला गया पांचवां टेंडर भी पिछले दिनों निरस्त हो चुका है। अब नई डीपीआर तैयार की जा रही है। छाता शुगर मिल वर्ष 1975 में बनकर तैयार हुई थी। मिल की शुरुआत वर्ष 1978 में क्षेत्रीय विधायक बाबू तेजपाल ने कराई थी। यह मिल आगरा मंडल की इकलौती मिल थी जिसकी कुल क्षमता 1250 टीसीडी थी। करीब 46 हजार किसान शुगर मिल को गन्ने की आपूर्ति करते थे। वर्ष 2009-2010 में गन्ना मिल को घाटे में दिखाकर बंद कर दिया गया था। इसके बाद तत्कालीन बसपा सरकार ने गन्ना मिल को बेचने की तैयारियां कर ली। छाता किसान संघर्ष समिति हाईकोर्ट से स्टे ले आई। वर्ष 2012 में सपा सरकार आई तो छाता शुगर मिल चालू होने की उम्मीद जागी। किसानों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात कर शुगर मिल को चालू कराने की मांग की। पूर्व विधायक ठाकुर तेजपाल सिंह ने भी मामले को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद भी हालात जस के तस रहे। इसके बाद भाजपा की सरकार आई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छाता शुगर मिल को चालू करने की घोषणा के बाद शासन ने छाता शुगर मिल की जमीन के बाजार मूल्य की जानकारी प्रशासन से मांगी थी। तत्कालीन डीएम मलप्पा बंगारी को शुगर मिल के एक्सीक्यूटिव डायरेक्टर राजीव मिश्रा ने रिपोर्ट सौंपी थी। इसे शासन को भेज दिया गया। रिपोर्ट में जानकारी दी गई थी कि मिल 100 एकड़ में फैली हुई थी। इसमें से 17 एकड़ जमीन हाइवे के चौड़ीकरण में चली गई। जमीन के एक हिस्से में फैक्ट्री, कुछ हिस्से में फार्म और कुछ हिस्से में कर्मियों के क्वार्टर और झाड़ियां हैं।
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Author: Vijay Singhal
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