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20 हजार से अधिक मुकदमों का पुराने कानूनों से होगा कोर्ट में ट्रायल

ByVijay Singhal

Jul 5, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। एक जुलाई से देश में तीन नए कानून लागू हो गए हैं। मगर, मथुरा में करीब 20 हजार मुकदमे ऐसे हैं, जिनका कोर्ट में ट्रायल पुराने कानूनों के आधार पर ही होगा। यह मुकदमे पूर्व से ही कोर्ट में ट्रायल, साक्ष्य, गवाही, बहस की प्रक्रिया में हैं। संयुक्त निदेशक अभियोजन चंद्रप्रकाश चौधरी ने बताया कि लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। जबकि यह साफ है कि जो मुकदमे कोर्ट में एक जुलाई से पूर्व ट्रायल के लिए दाखिल हुए हैं। उनमें साक्ष्य अधिनियम, सीआरपीसी और आईपीसी की धाराओं, रूल्स का पालन करते हुए कोर्ट सुनवाई करेगा। इनका भारतीय न्याय संहिता, नए साक्ष्य अधिनियम से कोई लेना देना नहीं रहेगा। एसपी क्राइम अवनीश मिश्र ने बताया कि पुलिस के पास एक जुलाई से पूर्व में लिखे गए, जितने भी मुकदमे विवेचना में लंबित हैं। उन सभी सभी में पुरानी आईपीसी, सीआरपीसी ही विवेचना के लिए लागू होगी। एक जुलाई या उसके बाद मुकदमे भारतीय न्याय संहिता की धाराओं में लिखे गए हैं, उनमें नए कानूनों के तहत विवेचना होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह बताते हैं कि पुराने कानून से कम से कम 20 वर्ष तक पीछा नहीं छूटेगा। दरअसल, जिन मुकदमों में कोर्ट में हाल में चार्जशीट दाखिल हुई है, उनमें चार्ज फ्रेम, गवाही, साक्ष्य, बहस के बाद निर्णय की स्थिति आते-आते इतना समय लग जाएगा। इसलिए आईपीसी और सीआरपीसी के साथ ही पुराने साक्ष्य अधिनियम से पुलिस, अधिवक्ता, कोर्ट, समाज का इतनी जल्दी पीछा नहीं छूटेगा।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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