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महान स्वतन्त्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह बने थे अखंड भारत के प्रथम राष्ट्राध्यक्ष

ByVijay Singhal

May 2, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। महान स्वतन्त्रता सेनानी राजा महेंद्र प्रताप की 43 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर भरतपुर रोड स्थित होटल नेवी रिसोर्ट मे “विचार संगोष्ठी” का आयोजन किया गया।
संस्था सचिव डॉ कृष्ण पाल सिंह तेवतिया के संचालन में जाट जनचेतना महासभा” द्वारा आयोजित  संगोष्ठी में वक्ताओं ने राजा साहब के जीवन संघर्ष पर प्रकाश डाला।
गैल के निदेशक शेरसिंह राणा ने बताया “विदेशों से भारत की स्वतंत्रता के लिए सहयोग अर्जित कर, काबुल अफगानिस्तान में देश की प्रथम सरकार बनाई, जिस कारण अंग्रेजों ने इनके सिर पर इनाम रख दिया। इसके बाद सारा राज्य हड़प लिया था। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता राजेन्द्र सिंह वर्मा ने उनकी विरासत संरक्षण के लिए सहयोग का आग्रह कर एकजुटता का संदेश दिया।
उप्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के समन्वयक चंद्र प्रताप सिंह सिकरवार पत्रकार ने बताया कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह ने सारे विश्व को जागृत किया था। अंग्रेजों से भारत की मुक्त कराने के लिए 32 वर्ष तक विदेश में रहकर संघर्ष करते रहे। उनके जीवनी बच्चों को पढाई जानी चाहिए।
संस्था सचिव डॉ कृष्ण पाल सिंह तेवतिया ने राजा साहब के जीवन परिचय देते हुए कहा कि 1952 में उन्हें नोबल पुरस्कार के लिए भी नामित किया गया था। 1909 में वृन्दावन में “प्रेम महाविद्यालय” की स्थापना की जो तकनीकी शिक्षा के लिए भारत में प्रथम केन्द्र था। मदनमोहन मालवीय इसके उद्धाटन समारोह में उपस्थित रहे। अपने पांच गाँव, वृन्दावन का राजमहल और चल संपत्ति का दान दिया। बनारस हिंदू विश्वद्यालय, अलीगढ़ विश्विद्यालय, के लिए जमीन दान दी। हिन्दू विश्वविद्यालय के बोर्ड के सदस्य भी रहे।
आयोजन में मुख्य रूप से लाल सिंह आर्य, मान सिंह, संतोष राणा, मोतीलाल, रामदुलारी, मछला, मुरारी, मुकेश, जनक सिंह, बच्चू सिंह वीरपाल, जगवीर सिंह, निरंजन शामिल हुए।
संगोष्ठी समापन संस्था अध्यक्ष रामपाल सिंह (पूर्व नेवी) द्वारा महान दानवीर, स्वतन्त्रता सेनानी, राष्ट्रवादी को पुण्यतिथि पर कोटि कोटि नमन कर धनयवाद ज्ञापित किया।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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