हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। गोवर्धन में वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी पर दानघाटी मंदिर में गिरिराजजी का विशेष अभिषेक किया गया। राधाकुंड और मानसी गंगा के जल और पंचगव्य सहित 108 किलो देशी गाय के दूध से भक्ति की धारा प्रवाहित हुई। बुधवार को भोर की बेला में ढप-ढोलक, घंटे-घड़ियाल की ध्वनि पर विश्व शांति व समृद्धि के लिए गिरिराजजी का अभिषेक किया गया। प्रभु को शीतलता प्रदान करने के लिए इत्र व गुलाब जल से मालिश की गई। श्रीपाद रघुनाथ दास गोस्वामी गद्दी-राधाकुंड के पीठाधीश्वर महंत केशव दास महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने द्वापर युग में गिरिराजजी का अभिषेक किया था। इस लीला को 5250 वर्ष हो गए हैं। प्रभु का अभिषेक मनुष्य को आत्मिक शांति एवं शारीरिक शक्ति प्रदान करता है। चांदी के कलश से अभिषेक कर प्रभु को अंग वस्त्र व चंदन लगाकर भोग लगाया। दानघाटी मंदिर के सेवाधिकारी मथुरा दास कौशिक ने बताया कि मई माह में गिरिराज महाराज की विशेष सेवा का शुभारंभ महाभिषेक के साथ किया गया है। श्रीकृष्ण के भाव में गिरिराजजी की पूजा बाल स्वरूप में की जाती है। गर्मी ज्यादा होने पर प्रभु के अभिषेक से लेकर खान-पान में परिवर्तन किया गया है। सेवायत पवन कौशिक, कन्हैया लाल शर्मा, राजकुमार कौशिक, सतीश कौशिक आदि मौजूद रहे। राधाकुंड। परिक्रमा मार्ग स्थित प्राचीन राधा रमन मंदिर में जगतगुरु गोपेश्वर आचार्य ने भक्तों के साथ सत्संग किया। बुधवार को उन्होंने कहा कि मनुष्य शरीर दुर्लभ है। सत्संग के द्वारा जीवन को सुधारा जा सकता है। संसार में यदि रहना चाहते हो तो भगवान की भक्ति प्रारंभ कर दो। भक्ति का मार्ग सुलभ है। इस पर चलने से पतन का भय नहीं रहता है। क्योंकि स्वयं भगवान रक्षा करते हैं। कहा कि संत, सद्गुरु, शास्त्र के वचनों में श्रद्धा व विश्वास रखकर चलने से जीवन सफल हो जाता है। भक्ति आने पर संसार से व्यक्त और भागवत का ज्ञान होता है। सेवा करना ही भागवत धर्म है।
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Author: Vijay Singhal
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