मेवाती सबसे ज्यादा शातिर
हरियाणा में नूंह, मेवात के अलावा गुरुग्राम और पलवल के जिले के तमाम गांव मेवाती रहती हैं। मथुरा में भी दो दर्जन से अधिक गांव में मेवाती बसे हैं। राजस्थान के भरतपुर और अलवर में भी पचास करीब पचास गांव मेवातियों के हैं। ज्यादातर मेवाती आपस में रिश्तेदार हैं। इनमें झारखंड के जामताड़ा से भी ज्यादा शातिर रहते हैं। लोगों को ठगना ही इनका वर्षों से धंधा बना है। हां, समय के साथ जरूर ठगी का तरीका बदल दिया गया। करीब 14 वर्षों से शातिर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। पहले ये लोगों को फोन कर खोदाई में सोने की ईंट मिलने की बात कहते, उसे सस्ते दाम पर बेचने की कहते और लोगों को बुलाकर उन्हें लूट लेते थे। इसके बाद व्यवस्था हाईटेक हुई, तो ओएलएक्स और अन्य सोशल साइट्स पर शातिरों ने पुराना सामान बेचने का विज्ञापन देना शुरू किया।
ठगने के अलग अलग फंडे
खुद को फौजी बताते तो अपनी कार बेचने की कहते। सस्ती कार खरीदने के चक्कर में लोग एडवांस पैसे दे देते या फिर उन्हें बुलाकर शातिर लूट लेते। अब ये शातिर और अत्याधुनिक तरीके अपना रहे हैं। फर्जी फेसबुक आइडी बनाकर संबंधित के मित्रों से रुपये मांगने के साथ ही लाटरी निकलने के नाम पर उनसे ठगी करते हैं। अब इन शातिरों ने सेक्सटार्सन का काम शुरू किया। लोगों को वाट्सएप पर वीडियोकाल कर न्यूड वीडियो दिखाते हैं और फिर उन्हें ब्लैक मेल करते हैं। हर माह बीस से 25 शिकायती पत्र साइबर सेल में पहुंच रहे हैं। बहुत से लोग शिकायत ही नहीं करते हैं।
रिश्तेदारों को सिखाकर बना रहे शातिर
ठग अपने ही रिश्तेदारों को इसके लिए बकायदा प्रशिक्षण देते हैं। जो पहले से साइबर क्राइम का काम जानते हैं, वह दूसरों को बकायदा इसके लिए प्रशिक्षित करते हैं। या तो उनके गांव जाते हैं या फिर अपने गांव बुलाकर उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। इसके एवज में वह कुछ न कुछ शुल्क जरूर लेते हैं। पुलिस कई बार शातिरों को पकड़ चुकी है। पूछताछ में शातिरों ने प्रशिक्षण की बात भी स्वीकारी।
बैंक कर्मचारी बन लोगों को फोन कर उनसे ओटीपी नंबर मांग खाते से रुपये साफ करते हैं।
-लाटरी निकलने का झांसा देकर लोगों से एडवांस के रूप में रुपये अपने खाते में डलवाते हैं।
-ट्रू कालर से लोगों का नाम जानकर उन्हें फोन करते हैं और फिर परेशानी बताकर उनसे रुपये ठगते हैं।
-न्यूड वीडियो काल कर लोगों को जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करते हैं।
फर्जी नाम की सिम का इस्तेमाल
शातिर फर्जी नाम से सिम का इस्तेमाल करते हैं। वहीं बैंक में फर्जी आधारकार्ड के जरिए अपने खाते खुलवाते हैं। ऐसे में पुलिस का मानना है कि मोबाइल कंपनियों में काम करने वाले लोग ही इन्हें ये सिम उपलब्ध कराते हैं। फर्जी खाते खुलवाने में भी कहीं न कहीं बैंक कर्मचारी शामिल होते हैं।
मथुरा के ये गांव प्रमुखता से शामिल
देवसेरस, मुड़सेरस, हाथिया, लहचौरा, मड़ौरा, विशंभरा, बाबूगढ़, जंघावली, कराहरी, पींगरी, उटावड समेत दो दर्जन से अधिक गांव शातिरों के हैं।
प्लानिंग के साथ चलेगा अभियान

एसएसपी अभिषेक यादव कहते हैं कि इन शातिरों के खिलाफ बाहर के राज्यों में अधिक मुकदमे हैं। ऐसे में इनका आपराधिक इतिहास जल्द पता नहीं चल पाता है। कोसिकलां, छाता, गोवर्धन और शेरगढ़ थाने से इन गांवों के शातिरों का डाटाबेस तैयार कराया जा रहा है। इसके बाद उन लोगों को खोजा जाएगा जो इन्हें सिम उपलब्ध कराते हैं। प्लानिंग के तहत इनके खिलाफ कार्रवाई होगी, तो निश्चित ही अंकुश लगेगा।
