हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। बृजेश गौतम एडवोकेट कोषाध्यक्ष बार एसोसिएशन मथुरा। सर्वप्रथम अपने वरिष्ठ व साथी अधिवक्ताओं को व छोटे भाइयों को धन्यवाद देता हूं जो मुझे लगातार मेरे अनशन में सहयोग प्रदान कर रहे हैं। मैं अपने सभी अधिवक्ता साथियों को अवगत कराना चाहता हूं कि बार एसोशीेएन मथुरा के दोनों पदाधिकारी निम्नतम स्तर पर उतर आए हैं। वह मुझ पर भी वे बुनियादी आरोप मुझे दबाने के लिए लगा रहे हैं ना मेरे द्वारा इनसे कोई चैंबर की मांग की गई न मेरे द्वारा इनसे किसी पैसे की मांग की गई ना मेरे द्वारा किसी दावत की ठेकेदारी के लिए इनसे कहा गया जो पदाधिकारी काजू और बादामों को अपनी जेब में रख कर ला सकते हैं उनकी सोच को आप समझिए कितनी निम्न सोच होगी उनकी इसीलिए मेरे ऊपर कोई भी वे बुनियादी आरोप लगा सकते हैं। दोनों पदाधिकारी व इनके चहते भाई व रिश्तेदार। खुद कितने दूध के धुले हुए हैं। यह मथुरा बार अच्छी तरह से जानती है। वह लोग मुझ पर आरोप लगा रहे हैं। मुझे मथुरा बार से न पहले एक भी रुपया चाहिए था ना आगे कभी चाहिए। और इस समय मथुरा बार में रावण राज चल रहा है और इन रावड़ो के हाथ से तो मुझे फूटी कौड़ी भी नहीं चाहिए।
मेरे अधिवक्ता साथियों मैं आपसे पूछना चाहता हूं मैं बिना मथुरा बार के प्रस्ताव के बिना कार्यकारिणी के प्रस्ताव के बिना जनरल हाउस के अपने चहितो को मृतक धनराशि में से दो-दो लाख रुपए दिए जा सकते हैं यह मथुरा बार के फंड का बंदर वाट नहीं है तो क्या है। मेरे अधिवक्ता साथियों में एक और बात आपसे पूछना चाहता हूं की 100 साल पुरानी बिल्डिंग को बिना प्रस्ताव के बिना किसी जनरल हाउस के तोड़ दिया गया और बिना किसी प्रस्ताव के अधिवक्ताओं को चैंबर चार-चार लाख रुपए में बेचे जा रहे हैं। वह पैसा ना बार में जमा हो रहा है। ना उसका कोई हिसाब किताब है। ना अधिवक्ताओं को कोई रसीद दी जा रही है तो क्या यह बार के फंड के साथ बंदर बाटा नहीं है। मेरी अधिवक्ता साथियों इन दोनों पदाधिकारी की निम्नतम सोच को देखिए वाइट देते समय अध्यक्ष/सचिव महोदय के चेहरे से वह भाषा से अहंकार इतना झलक रहा है। कि मुझे लगता है। यह दोनों लोग वोखला गये हैं। अध्यक्ष तो इतने वोखला ने लगे हैं की अधिवक्ता समाज में जातिवाद फैला रहे हैं।और कह रहे थे या राजपूत अध्यक्ष होना कुछ जातियों के लोगों को अच्छा नहीं लगता है श्रीमान जी चुनाव से पहले आप भी कहते थे हमारी कोई जाति नहीं है हमारी जाति कालाकोट है। लेकिन अब आप राजपूत कैसे हो गए अध्यक्ष जी आपको सभी जाति के लोगों ने वोट दिया है एक जाति के वोट से ना कभी कोई अध्यक्ष सेक्रेटरी यहां बना है। ना आगे कभी बनेगा और आप यह मत सोचिए कि आप दोनों पदाधिकारी को मेरिट के आधार पर यहां चुना गया है आप को 3,3,4,4 साल लग गए तब अधिवक्ताओं आपको रहमों करम के आधार पर इस पद पर चुना गया है। इसीलिए इस पद की गरिमा को समझिए और बार के फंड के हिसाब किताब को अधिवक्ताओं के Self उजागर करिए अगर आप ईमानदार हैं तो बार की लेखा जोखा को प्रत्येक अधिवक्ता के सामने उजागर करिए। अपने अपने आप को ईमानदारी का सर्टिफिकेट देने के लिए एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी के लोग आपको ईमानदारी का सर्टिफिकेट दे देंगे तो आप ईमानदार नहीं माने जाओगे जब तक बार एसोसिएशन मथुरा के हाल में जनरल हाउस नहीं बुलाया जाएगा यह बृजेश गौतम धरने से हटेगा नहीं। क्योंकि बार का फंड कमेटी के लोगों व पदाधिकारीयो का व्यक्तिगत फंड नहीं है यह मथुरा बार के 3000 अधिवक्ताओं का फंड है। इसलिए निर्णय भी उन्ही 3000 अधिवक्ताओं के सामने होना चाहिए। एक कमरे में बंद होकर निर्णय कतई स्वीकार नहीं होगा धरना में उपस्थित बरिष्ठ अधिवक्ता गुरु महेश्वर नाथ श्री राजेंद्र चौधरी गिड़ोह शिव कुमार लवानिया राम करन गौरव चौधरी अश्वनी शुक्ला विष्णु शर्मा राजेंद्र फेरारी पवन उपाध्याय पूर्व सचिव राज कुमार उपाध्याय आदि उपस्थित रहे।
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Author: Vijay Singhal
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