हिदुस्तान 24 टीबी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। धर्म और आस्था की नगरी मथुरा को जाट बाहुल्य कहा जाता है। यही कारण है कि यहां से नौ बार जाट उम्मीदवारों को संसद का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है जबकि जाटों के प्रतिद्वंदी के रूप में ठाकुर सामने आए हैं। चार बार ठाकुरों को सांसद बनने का मौका मिला है। मथुरा संसदीय क्षेत्र का चौकाने वाला तथ्य यह भी है कि यहां से पहला सांसद बनने का मौका बनिया के रूप में प्रो कृष्ण चंद्र को मिला है।
मथुरा लोकसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास रोचक रहा है। खासकर आजाद भारत में यहां कई दिग्गजों ने हार और जीत का स्वाद चखा है। जातिगत आधार देखे तो इस क्षेत्र को जाट बाहुल्य कहा जाता है। विभिन्न लोकसभा चुनावों के नतीजों में यह सिद्ध भी होता है। पहले चुनाव को छोडकर यहां जाट और ठाकुरों के बीच प्रतिद्वंदिता रही है। 1952 में हुए आजाद भारत के पहले आम चुनाव में मथुरा से कांग्रेस प्रत्याशी प्रो कृष्ण चंद्र को अपना पहला सांसद चुना था। प्रो कृष्ण चंद्र बिजनौर के गांव दारा नगर के रहने वाले थे। शादी के बाद वे यहां प्रेम महाविद्यालय में प्रोफेसर बनकर आ गए। यहां स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी सैनानी बन गए। इस दौरान वे 8 बार जेल गए। जिला कांग्रेस के अध्यक्ष और वृंदावन नगर पालिका के मनोनीत अध्यक्ष और दो बार एमएलसी भी रहे। मथुरा के बाद उन्होंने दूसरा चुनाव जलेसर से जीता था। उन्होंने पहले चुनाव में अपने ही नेता राजा महेंद्र प्रताप को मथुरा से हराया था। इसके बाद 1957, 1962,1967 में हुए लोकसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला जाटों के बीच हुआ। राजा महेंद्र प्रताप, दिगम्बर सिंह और राजा बच्चू सिंह सांसद चुने गए। 1971 के आम चुनाव में पहली बार ठाकुर के रूप में चकलेश्वर सिंह को प्रतिनिधित्व मिला। हालांकि उनका मुकाबला जाट के रूप में चौधरी दिगम्बर सिंह से ही हुआ था। 1977 में ठाकुर रामहेत सिंह को हराकर मनीराम बांगडी चुने गए। दो चुनाव के बाद ठाकुरों ने फिर बाजी पलटी और कुंवर मानवेंद्र सिंह को यहां प्रतिनिधित्व का मौका मिला। 1984 के इस चुनाव में तो मानवेंद्र सिंह ने चौधरी चरण सिंह की पत्नी गाय़त्री देवी को हराया था। 1989 में मानवेंद्र सिंह ने यह जीत फिर दोहरायी। 1991 में गैर जाट और गैर ठाकुर के रूप में सच्चिदानंद साक्षी को चुना गया। 1952 के बाद यह पहला मौका था जब मथुरा की जनता ने दोनों जातियों को दरकिनार किया था। इन दोनों जातियों की प्रतिद्वंदिता के बीच 2014 में भाजपा से सिने अभिनेत्री हेमामालिनी सांसद बनीं। सामाजिक व्यवस्था के अनुसार सिने अभिनेता धर्मेंद्र की पत्नी होने के नाते हेमामालिनी जाट हैं जबकि उनके जन्म के अनुसार जाति ब्राहमण है।
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Author: Vijay Singhal
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