हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। स्कूलों में नए सत्र की शुरुआत हो चुकी है। पुस्तकें खरीदने के लिए दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग रही है। स्कूलों के भी अपने-अपने दुकानदार हैं, जिनके प्रतिष्ठानों पर ही संबंधित स्कूलों की पुस्तकें मिल रही हैं। दाम मनमाने हैं, लेकिन अभिभावकों की भी मजबूरी है।
जिला विद्यालय निरीक्षक के साफ निर्देश हैं कि अभिभावक और छात्र अपनी पसंद की दुकान से पुस्तकें खरीद सकते हैं लेकिन असल में ऐसा नहीं हो रहा है। सीबीएसई बोर्ड के कई स्कूलों की पुस्तकें केवल स्कूल संचालकों की पसंद की दुकानों पर ही मिल रही हैं। हर जगह उन स्कूलों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों से अभिभावकों को पुस्तकों की सूची थमा दी जाती है। प्रकाशकों के नाम तय कर दिए जाते हैं और यह भी बता दिया जाता है कि उन्हें ये पुस्तकें कहां मिलेगी। पुस्तकों के जो रेट स्कूल से दी गई सूची में लगे होते हैं, उन्हीं रेट पर पर दुकानदार बेच रहे हैं। अभिभावक मजबूर हैं। बच्चे को पेरशान किए जाने के डर से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। पोस्ट ऑफिस मार्ग स्थित एक दुकान पर मंगलवार को एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अपने अभिभावक के साथ स्कूल से दी गई पुस्तकों की पर्ची लेकर पहुंचा। सूची में तय की गई दर के अनुसार किताबें खरीदी और चला गया। पूछने पर भी अपनी पीड़ा खुलकर नहीं बता पाए। पुस्तकें ही नहीं, स्कूल ड्रेस के लिए भी दुकानें तय पुस्तकों के अलावा स्कूल ड्रेस के लिए भी दुकानें तय हैं। स्कूलों से बच्चों को दुकान और पता बता दिया जाता है। ताज्जुब इस बात का है कि स्कूल संचालकों ने जो दुकानें तय की हैं, उन्हीं पर भी ड्रेस मिल रही है। इसके चलते दुकानदार भी मुंहमांगे रेट पर ड्रेस बेच रहे हैं। ड्रेस और पुस्तकों के पीछे कमीशन का खेल
बताया जा रहा है कि स्कूल संचालक कमीशन के लालच में यह सब कर रहे हैं। दुकानों से स्कूल संचालकों की सांठगांठ हैं। पुस्तकों के हर सेट और ड्रेस पर कमीशन की रकम तय है। बच्चे और अभिभावक परेशान है लेकिन खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। भास्कर मिश्रा
जिला विद्यालय निरीक्षक के साफ निर्देश हैं कि अभिभावक और छात्र अपनी पसंद की दुकान से पुस्तकें खरीद सकते हैं लेकिन असल में ऐसा नहीं हो रहा है। सीबीएसई बोर्ड के कई स्कूलों की पुस्तकें केवल स्कूल संचालकों की पसंद की दुकानों पर ही मिल रही हैं। हर जगह उन स्कूलों की किताबें उपलब्ध नहीं हैं। स्कूलों से अभिभावकों को पुस्तकों की सूची थमा दी जाती है। प्रकाशकों के नाम तय कर दिए जाते हैं और यह भी बता दिया जाता है कि उन्हें ये पुस्तकें कहां मिलेगी। पुस्तकों के जो रेट स्कूल से दी गई सूची में लगे होते हैं, उन्हीं रेट पर पर दुकानदार बेच रहे हैं। अभिभावक मजबूर हैं। बच्चे को पेरशान किए जाने के डर से शिकायत भी नहीं कर पा रहे हैं। पोस्ट ऑफिस मार्ग स्थित एक दुकान पर मंगलवार को एक निजी स्कूल में पढ़ने वाले छात्र अपने अभिभावक के साथ स्कूल से दी गई पुस्तकों की पर्ची लेकर पहुंचा। सूची में तय की गई दर के अनुसार किताबें खरीदी और चला गया। पूछने पर भी अपनी पीड़ा खुलकर नहीं बता पाए। पुस्तकें ही नहीं, स्कूल ड्रेस के लिए भी दुकानें तय पुस्तकों के अलावा स्कूल ड्रेस के लिए भी दुकानें तय हैं। स्कूलों से बच्चों को दुकान और पता बता दिया जाता है। ताज्जुब इस बात का है कि स्कूल संचालकों ने जो दुकानें तय की हैं, उन्हीं पर भी ड्रेस मिल रही है। इसके चलते दुकानदार भी मुंहमांगे रेट पर ड्रेस बेच रहे हैं। ड्रेस और पुस्तकों के पीछे कमीशन का खेल
बताया जा रहा है कि स्कूल संचालक कमीशन के लालच में यह सब कर रहे हैं। दुकानों से स्कूल संचालकों की सांठगांठ हैं। पुस्तकों के हर सेट और ड्रेस पर कमीशन की रकम तय है। बच्चे और अभिभावक परेशान है लेकिन खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। भास्कर मिश्रा
डीआईओएस ने कहा छात्रों और अभिभावकों पर किसी एक दुकान से बुक सेट खरीदने का दबाव नहीं डाला जा सकता है। कोई अभिभावक शिकायत करेगा तो मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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Author: Vijay Singhal
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