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वृंदावन की भव्यता बढ़ाने को तैयार हुआ चंद्रोदय मंदिर, दुनिया का सबसे ऊंचा टावर होगा वृंदावन हेरीटेज टावर

ByVijay Singhal

Mar 8, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में आने वाले एक दो वर्ष में प्रभु श्री कृष्ण की आधुनिक नगरी वृंदावन का स्वरूप अलग ही दिखाई देने लगेगा । श्रीबिहारी जी मंदिर के साथ-साथ प्रेम मंदिर में दर्शन के लिए लाखों की संख्या में देश विदेश से भक्त प्रतिदिन आते हैं। अब नगर में चंद्रोदय मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने जा रहा है। 70 मंजिला वृंदावन हेरीटेज टावर जो कि वृंदावन चंद्रोदय मंदिर के नाम से जाना जाता है आगे आने वाले समय में वृंदावन की पावन भूमि पर बनने वाला दुनिया का सबसे ऊंचा टावर होगा। यह ब्रज की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का समागम होगा। इसके माध्यम से प्रचारित भगवान श्री कृष्ण और श्रीमद् भगवद् गीता का उपदेश देश विदेश के लोगों के जीवन में सनातन धर्म की प्रेरणा देगा। इस मन्दिर की की परिकल्पना स्वयं श्रील प्रभुपाद के माध्यम से हुई है। उनकी इच्छा थी कि श्री कृष्ण का एक भव्य और गगन चुम्बी मंदिर बने और श्री धाम वृंदावन पूरी दुनिया में जाना जाए। टावर का डिजाइन वृंदावन के ही दो मंदिर राधा मदन मोहन मंदिर और श्री राधा गोविंद देव मंदिर की प्रेरणा से ली गई है । यह दोनों मंदिर के समागम से ब्रजभूमि की समृद्ध विरासत उजागर होगी। टावर की संरचना बहुत ही विशाल है और इसमें 70 मंजिल होगी अभी इसका साउथ ब्लॉक तैयार है। टावर के साउथ ब्लॉक के विशाल मंदिर भवन में श्री श्री राधा वृंदावन चंद्र के दर्शन श्रद्धालुओं को अब मिल रहे हैं और साथ ही अन्य सुविधाएं जैसे प्रसाद काउंटर, गीता काउंटर और रेस्टोरेंट की सुविधा भी मौजूद है। इस मंदिर के माध्यम से प्रतिदिन 500 साधुओं को प्रसाद प्राप्त करवाया जाता है। सभी दर्शनार्थियों को खिचड़ी प्रसाद भी दिया जाता है। 300 से अधिक गोवंश की देखरेख भी मंदिर परिसर में बहुत उचित तरीके से की जाती है। मधु पंडित दासा और चंचलपति दासा के नेतत्व में मंदिर को भव्य रूप प्रदान किया जा रहा। सबसे ख़ास बात तो यह है कि मंदिर प्रबंधन द्वारा प्रतिदिन चार स्थानों पर सुबह शाम साधु भोजन कराने के साथ साथ विधवा माताओं की पूर्ण देखभाल , निःशुल्क दवा का वितरण कार्य और तो और वृंदावन परिक्रमा मार्ग में रात्रि साढ़े 9 बजे से सुबह 5 बजे तक 18 स्वंय सेवक सफाई कार्य को अंजाम देकर सार्वजानिक सेवा में योगदान देते है। 300 गौवंश मंदिर की गौशाला में है जिनसे प्राप्त दुग्ध उत्पादों से प्रभु की सेवा की जाती है। कहा जाए तो आने वाले समय में वृंदावन हेरीटेज टावर न सिर्फ एक टूरिज्म हब की दृष्टिकोण से बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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