हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा 04 मार्च। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ-अनुसंधान संस्थान का 13वां दीक्षांत समारोह महामहिम राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। महामहिम राज्यपाल जी ने कार्यकम का शुभारम्भ जलभरो अनुष्ठान के साथ प्रारम्भ किया। कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल जी ने Bovine Myology: A colour atlas तथा Veterinary Andrology and Artificial Insemination: Concepts and Application शीर्षक नामक पुस्तकों का विमोचन किया। उन्होंने पशुपालकों के उपयोग हेतु पशुओं को होने वाली सामान्य व्याधियों के पारम्परिक व घरेलु नुस्खों से उपचार के सात वैज्ञानिक लघु प्रकाशनों का विमोचन किया। छात्र दिग्दर्शिका के दूसरे संस्करण का विमोचन किया। पशुओं की बातें प्रसारण का शुभारम्भ, विश्वविद्यालय संवादपत्र खण्ड 19 सं 02 तथा विश्वविद्यालय पशुधन पत्रिका खण्ड 17 का विमोचन किया।
दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि, बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, पटना के कुलपति डॉ. रामेश्वर सिंह उपस्थित रहे। दीक्षांत समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में आयोजित किया गया। दीक्षांत समारोह में 79 पशु चिकित्सा विज्ञान स्नातक, 27 जैव प्रौद्योगिकी स्नातक, 32 परास्नातक तथा चार पीएचडी सहित कुल 142 उपाधियां दी गई। दीक्षांत समारोह में मेधावियों को सम्मानित करने के लिए कुल 14 स्वर्ण पदक, 04 रजत पदक तथा 02 कांस्य पदक कुलाधिपति महोदया द्वारा वितरित किए गये। कुल 14 स्वर्ण पदक विजेताओं में नौ छात्राएं तथा पांच छात्र सम्मिलित हैं। स्वर्ण पदक का 64 प्रतिशत प्राप्त करते हुए छात्राओं ने महिला सशक्तिकरण की मिशाल पेश की है। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय का सर्वश्रेष्ठ विभाग, सर्वश्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार तथा दो परास्नातक एवं दो पीएचडी सर्वश्रेष्ठ थीसिस सम्मान भी प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल महोदया जी ने 25 प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को कहानी की किताबें, ड्राइंग बुक, पेंसिल, रबर तथा शार्पनर के साथ पेंसिल बॉक्स, क्रेयॉन कलर का पैकेट, सेब, नारंगी, छाछ, बिस्कुट, चॉकलेट, केक आदि का वितरण किया। कार्यक्रम में 10 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आंगनबाडी संसाधन किट वितरित की गई, जिसमें ट्राई साइकिल, अंक, अल्फाबेट, फल, पशु, ब्लॉक, गेंद, क्ले, रिंग्स, पंचतंत्र की कहानियों की किताबें, शैक्षणिक मानचित्र, माकर और डस्टर के साथ सफेद बोर्ड, किडनी शेपेड मेज, कुर्सियां आदि हैं। 10 आंगनबाडी कार्यकत्रियों में कुसुम लता, सुमन देवी, रामवेटी, मंजू, प्रेमवती, कमला, पुष्पा यादव, मंजूलता, जयश्री तथा रसंमा वरुण आदि सम्मिलित हैं। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या महामहिम राज्यपाल एवं माननीय कुलाधिपति महोदया के समक्ष प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में महामहिम राज्यपाल महोदया जी ने 25 प्राथमिक विद्यालय के छात्रों को कहानी की किताबें, ड्राइंग बुक, पेंसिल, रबर तथा शार्पनर के साथ पेंसिल बॉक्स, क्रेयॉन कलर का पैकेट, सेब, नारंगी, छाछ, बिस्कुट, चॉकलेट, केक आदि का वितरण किया। कार्यक्रम में 10 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को आंगनबाडी संसाधन किट वितरित की गई, जिसमें ट्राई साइकिल, अंक, अल्फाबेट, फल, पशु, ब्लॉक, गेंद, क्ले, रिंग्स, पंचतंत्र की कहानियों की किताबें, शैक्षणिक मानचित्र, माकर और डस्टर के साथ सफेद बोर्ड, किडनी शेपेड मेज, कुर्सियां आदि हैं। 10 आंगनबाडी कार्यकत्रियों में कुसुम लता, सुमन देवी, रामवेटी, मंजू, प्रेमवती, कमला, पुष्पा यादव, मंजूलता, जयश्री तथा रसंमा वरुण आदि सम्मिलित हैं। समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अनिल कुमार श्रीवास्तव द्वारा विश्वविद्यालय की प्रगति आख्या महामहिम राज्यपाल एवं माननीय कुलाधिपति महोदया के समक्ष प्रस्तुत की गई।
महामहिम राज्यपाल जी ने कार्यकम में उपस्थित छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि मथुरा में स्थापित पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान के 13वें दीक्षान्त समारोह में आप सभी को उपाधि एवं पदक प्रदान करते हुए मुझे अपार प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। सबसे पहले मैं भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा को प्रणाम करती हूँ, जहां सूरदास, स्वामी हरिदास तथा रसखान जैसे महान कवियों का जन्म हुआा। आपके इस संस्थान को एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी के नाम से जाना जाता है। उनके दृढ़ संकल्प, संयम एवं निरन्तर प्रयास और एकात्म मानववाद के पथ पर चलकर हर असम्भव कार्य को सम्भव बनाया जा सकता है। मैं आज उन्हें और उनके विचारों को आदरपूर्वक नमन करती हूँ। पंडित उपाध्याय जी ऐसे महान चिन्तक एवं समाजसेवी थे, जिन्होंने देश और समाज की सेवा करते हुए अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के चरणों में अर्पित कर दिया था।
आज के अवसर पर मैं न केवल उपाधि व पदक प्राप्त करने वाले, बल्कि आपने अखिल भारतीय स्तर पर जो शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं खेलकूद, युवा उत्सवों व अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भी रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेकर देश का गौरव बढ़ाया है, इसके लिये आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देती हूँ। इसके साथ ही में आपके माता-पिता, अभिभावकों तथा गुरूजनों का भी अभिनन्दन करती हूँ, जिन्होंने इस सुखद सोपान पर लाने के लिये आपका मार्गदर्शन किया है। आज के दीक्षान्त में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित बिहार पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, बिहार के कुलपति प्रोफेसर रामेश्वर सिंह जी का मैं स्वागत व अभिनन्दन करती हूँ।
हरियाणा के रोहतक जनपद में जन्में डॉ० रामेश्वर सिंह जी ने शिक्षा ग्रहण करने के उपरान्त सन् 1978 में भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर, बरेली में एक वैज्ञानिक के रूप में शामिल हुए। इसके बाद राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल और नेशनल कलेक्शन ऑफ डेयरी कल्चर में कार्यभार भी संभाला। आपने इन संस्थाओं के सुदृढीकरण और आधुनिकीकरण में प्रमुख भूमिका निभाई। आपने सूक्ष्मजीव, डेयरी उद्योग के साथ सहयोगी परियोजनाओं पर बहुत काम किया है। मुझे विश्वास है कि आज आप द्वारा यहां दिया गया दीक्षांत उद्बोधन हमारे विद्यार्थियों के भावी जीवन के लिये प्रेरक सिद्ध होगा। दीक्षान्त समारोह का दिन हर विद्यार्थी के जीवन का एक यादगार दिन होता है। इस दिन की मधुर यादें सदा आपके साथ रहेंगी। आज के दिन आपकी मेहनत सफल हुई है और आप भविष्य की सीढ़ियाँ चढ़ने जा रहे हैं। आज आप अनंत अवसरों का उपयोग करने के लिए तैयार होकर इस संस्थान से जा रहे हैं। आज आपने जो डिग्रियां और पदक अर्जित किए हैं, वे आपको रोजगार हासिल करने या व्यवसाय शुरू करने में मदद करेंगे। लेकिन एक गुण जो आपको बहुत आगे ले जा सकता है, वह है जीवन में कभी हार न मानने का हौसला। परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, व्यक्ति को कभी भी हार नहीं माननी चाहिए।
प्रिय छात्रों मैं गुजरात से हूँ और गुजरात में एक कहावत है कि-‘भग्या त्यांथी सवार जिसका मतलब है कि नई शुरुआत करने के लिए कभी भी देर नहीं होनी चाहिए। आपको सदैव स्मरण रखना होगा कि अभ्यास ही व्यक्ति को निपुण बनाता है। इसलिए जहां अपनी शिक्षा अवधि के दौरान आपने जो भी सीखा है, उसका निरन्तर अभ्यास करते रहें। आज मैंने देखा कि दूसरी यूनिवर्सिटीयों में तो 80 प्रतिशत लड़कियां मेडल ला रही हैं, लेकिन दूसरी यूनिवर्सिटी में में दीक्षांत में गई हैं, तो वहां थोडा सा महिलाओं का कम था, लेकिन यह पशु विश्वविद्यालय में महिलायें आगे रहीं हैं। पशुपालन में भी महिलायें पढ़ने के लिए आ रही हैं, खुशी की बात है मित्रों और एक लड़की पांच मेडल लेकर गई। आप सबको बहुत बहुत बधाई देती हूँ। यह भारत का भविष्य उज्जवल है वो दिखाता है। पहले महिलाओं को शिक्षा नहीं मिलती थी, आपके माता पिता होंगे तो कम पढे लिखे होंगे, लेकिन आज की जो माता है जो नई पीढ़ी है वह सब क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। एक ऐसा क्षेत्र नहीं है जहां पर महिलाओं का योगदान न हो और धीरे धीरे ऐसे 10-12 साल के बाद ऐसी स्थिति जरूर आयेगी जहां ऊपर बैठें हैं वहां महिलायें होंगी और आप सब नीचे दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से मेहनत करो और आगे बढ़ो।
मुझे आशा है कि इस विश्वविद्यालय के छात्र प्रौद्योगिकी आधारित कृषि व पशुपालन को बढ़ावा देकर किसानों व पशुपालकों की आय को दोगुने से भी अधिक करने में सहायता कर सकते हैं। मुझे बताया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा पिछले एक वर्ष में अलग-अलग विषयों पर आठ राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के सम्मेलनों व कार्यशालाओं का आयोजन किया गया, जिनके माध्यम से छात्रों, पशुपालकों व किसानों को वैज्ञानिक रूप से पोषक तत्वों से युक्त पुष्टाहार, पशु आहार, दुग्ध उत्पादन में वृद्धि लाने की विधियों व रोगों के त्वरित निदान हेतु उठाये जाने वाले उपायों की जानकारी प्रदान की गई। पशुपालन करते हैं, दूध का उत्पादन करते हैं और दूसरी ओर हमारे बच्चे कुपोषित भी है, टीबी वाले हैं, कई प्रकार के रोग कैंसर ऐसा भी हो रहा है। तो क्या इसमें कुछ ज्वांइटली काम हो सकता है। एक ओर हम यह कहते हैं कि हम उनको सिखाते हैं, पौष्टिक आहार बनाइये पौष्टिक आहार खाईये, तो बीमारी नहीं बढ़नी चाहिए इसका मतलब यह है कि बोलना अलग है-खाना अलग है. सिखाना अलग है-लेकिन घर में कुछ नहीं करना है। इसी बजह से आज हमारे छोटे छोटे बच्चे बीमारी से ग्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता के साथ घर के पशुओं द्वारा दिये गये दूध का अधिकाधिक प्रयोग घर में करें। पनीर बनाईये महिलाओं को पनीर खिलाईये, दही खिलाईये, दूध पिलाईये और एक संकल्प करवाईये कि मेरे कोख से जो बच्चा का जन्म होगा वो स्वस्थ होगा बीमारू नहीं होगा। अब तो बच्चों को जन्म से ही डायबीटीज है-जन्म से ही कैंसर है। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटीज को यह समझना पड़ेगा कि समाज में क्या समस्या है-किसान के घर में क्या समस्या है किसान के घर में कोई बेटी बहू प्रेगेन्ट है, तो उन्हें सिखाना पड़ेगा कि क्या खिलाइये उनको और संकल्प करवाईये कि एक स्वस्थ बच्चे का जन्म हो। जो हम यूनिवर्सिटी में पढ़ाते है वो घर तक महिला तक जाये।
उन्होंने कहा कि मुझे यह विश्वास हुआ है कि जो महिलायें बेटियां जो पशुपालन में आ रही हैं वो कम से कम अपनी प्रेग्रेनेंसी में और जब अपने बच्चों का पालन करेंगे तब यह सब चीजें उनको खिलायेंगे और एक भी बच्चा कुपोषित न हो वो प्रयास जरूर करेंगे। जो सीखना है वही जीवन में उतारना भी है। परिवार को सशक्त बनाना है-बच्चे को भी सशक्त बनाना है। मुझे प्रसन्नता है कि विश्वविद्यालय के शरीर रचना विज्ञान विभाग द्वारा पशुपालकों की सहायता के लिए एक मोबाईल एप को लांच किया गया है, जिसकी मदद से अगर कोई पशुपालक प्रयोगशाला में नहीं जा पा रहा है, तो वह घर बैठकर इससे मदद प्राप्त कर सकता है। इसके साथ ही पशुपालकों, किसानों व आमजन को उनके घर बैठे विभिन्न विषयों पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिये द्विभाषीय पोडकॉस्ट पशुधन की बातें’ की भी शुरूआत विश्वविद्यालय द्वारा की गई है। इसके लिये मैं विश्वविद्यालय को बधाई देती हूँ।
मित्रों कई हमारे अलग अलग प्रकार के काम करने वाले डॉक्टरों, कई ऐसी बुक्स लिखी है, जिसमें से कई बुक्स मैंने पढ़ी भी है और कई लोगों का लेक्चर भी मैंने सुना है। वो यह कहते हैं और एक रिसर्च के माध्यम से सत्य हुआ है कि प्रेगनेंसी होती है, तो उसी समय जो शरीर की अंगरचना बनती है-पैर, हाथ, नाक, आंख कब आते हैं उसका समय निश्चित होता है और निश्चित समय में निश्चित खाना, निश्चित पोषण, पोषक तत्व उसको उसी समय मिलना चाहिए। जो पोषक तत्व उसी समय उसको नहीं मिलेगा और उसी समय उसकी आआंख बनती होगी, तो आंख दृष्टिबाधित हो जायेगी। यह सब सिखाने की आवश्यकता है हमारे लोगों को। जब ऐसी सोच, ज्ञान और अच्छी समझ लेकर बच्चे घर पर जायेंग और जब यह स्थिति हमारे घर में आयेगी, तब मुझे लगता है कि धीरे धीरे करके ऐसे बच्चों की संख्या कम हो जायेगी। मित्रों, मैं इस मंच से यह कहना चाहूंगी कि वर्तमान में पशुपालन देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है, जिसमें हमारे पूर्व के वैज्ञानिकों द्वारा लाई गई हरित क्रांति, दुग्ध क्रांति, नीली क्रांति, गुलाबी क्रांति सभी की भूमिका रही है। वैज्ञानिक पद्धति के प्रयोग से हम अपने पशुओं का दुग्ध उत्पादन, मछली पालन, मधुमक्खी पालन, रेशम उत्पादन, अण्डों व मांस का उत्पादन बढ़ाकर सकल घरेलू उत्पाद में अपने योगदान का प्रतिशत निरन्तर बढ़ा रहे हैं और आगे भी बढ़ाते रहेंगे। लेकिन अब रोग भी बढ़ रहे हैं, आज यूपी में 13 लाख महिलायें कैंसर से पीडित हैं. इन सबको इससे जोडने की आवश्यकता है। तीव्र गति से बढ़ रही मानव जनसंख्या के दृष्टिगत खाद्य आपूर्ति हेतु हमारी पशुधन की संख्या में वृद्धि किये जाने की भी आवश्यकता है। आपको यह बताते हुए मुझे प्रसन्नता है कि हमारे देश में गौवंश व महिषवंश की कुल संख्या 1951 की पशुगणना के अनुसार लगभग 19.7 करोड़ थी, वर्ष 2019 में जो बढ़कर लगभग 30.3 करोड़ हुई व वर्ष 2022 के अनुसार 30.8 करोड़ हो चुकी है और आबादी 140 करोड़ हो चुकी है
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पशुधन की स्वास्थ्य रक्षा व उनके उत्पादन को बढ़ाने के लिए केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। विश्वविद्यालय की महिला अध्ययन केन्द्र इकाई द्वारा ग्रामीण महिला कृषकों व पशुपालकों को योजनाओं की जानकारी प्रदान की जा रही है। महिलाओं की पशुपालन व समाज में हर स्तर पर भागीदारी यह दर्शाती है कि महिला न केवल परिवार, बल्कि समाज की भी रीढ़ है। आज भारतीय महिलाएं ऊर्जा से लबरेज, दूरदर्शिता, जीवन्त उत्साह और प्रतिबद्धता के साथ सभी चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। ग्रामीण परिदृश्य में महिलाओं की बड़ी आबादी है। इन्हें शिक्षा और कौशल के माध्यम से व्यवसाय की ओर प्रोत्साहित कर आर्थिक रूप से सुदृढ़ किया जा सकता है। महिलाओं की शिक्षा, विकास व आमदनी को बढ़ाने के लिये कन्या सुमंगला योजना, कस्तूरबा गांधी विद्यालय योजना, मिशन शक्ति योजना, राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना, मुख्यमंत्री सहभागिता योजना, पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना, पशुधन बीमा योजना, नंद बाबा पशुपालक प्रोत्साहन योजना व कई अन्य प्रोत्साहन योजनायें सरकार द्वारा चलाई जा रही हैं। मुझे अवगत कराया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा ज्ञान व कौशल विकास हेतु 22 संकाय सदस्यों व 67 विद्यार्थियों ने आईडीपी-एनएएचईपी परियोजना के अन्तर्गत अमेरिका, कनाडा, फिलीपिन्स, थाईलैण्ड, वियतनाम, जापान, क्रोएशिया, स्वीडन व दक्षिणी कोरिया आदि देशों के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त छात्रों की दक्षता व निपुणता में वृद्धि करने के संकल्प के साथ व्यवसायिक रूप से भाषा ज्ञान को बढ़ाने हेतु फ्रेंच, जर्मन व स्पैनिश भाषा की कक्षाओं का भी छात्रों हेतु आयोजन किया गया, जो प्रशंसनीय है। इस वर्ष विश्वविद्यालय ने तकनीकी ज्ञान को साझा करने की सोच व उददेश्य के साथ सात नये संस्थानों से एम०ओ०यू० साइन किये है।
मुझे खुशी है कि इस विश्वविद्यालय में दो नये महाविद्यालयों यथा मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय तथा डेयरी सांइस महाविद्यालय शीघ्र ही आरम्भ होने जा रहे हैं। मैं बताना चाहूंगी कि केन्द्र सरकार के प्रयासों से देशभर में पिछले दस वर्षों में दूग्ध उत्पादन लगभग 45 प्रतिशत बढ़ा है। आज भारत दुनिया का लगभग 22 प्रतिशत दूग्ध उत्पादन करता है। आज उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक दूग्ध उत्पादक राज्य तो है ही, डेयरी सेक्टर के विस्तार में भी बहुत आगे है। इस दृष्टि से इस विश्वविद्यालय को अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
देश का डेयरी सेक्टर, पशुपालन, श्वेत क्रांति में नई ऊर्जा, किसानों की स्थिति को बदलने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है। पशुपालन देश के छोटे किसानों के लिये अतिरिक्त आय का बहुत बड़ा साधन है। भारत के डेयरी प्रॉडक्ट्स का विदेशों में बहुत बड़ा बाजार है। पशुपालन महिलाओं के आर्थिक उत्थान, उनकी उद्यमशीलता को आगे बढ़ाने का बहुत बड़ा माध्यम है। इसके साथ ही पशुधन बायोगैस, जैविक खेती, प्राकृतिक खेती का भी बहुत बड़ा आधार है। जो पशु दूध देने योग्य नहीं रह जाते हैं, वो बोझ नहीं होते, बल्कि वे भी हर दिन किसानों की आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो पशु आपके पास है, उसे नहीं छोड़ना चाहिए, जब तक वह मरे नही तब तक हमें उसकी सेवा ही करनी चाहिए, क्योंकि जीवन भर उसने हमारी सेवा की, हमें दूध, दही, घी, पनीर आदि दिया। हमें यह करना चाहिए कि यदि घर में पांच लीटर दूध आता है, तो पांच लीटर में से दो लीटर दूध घर के लिए रहना चाहिए और तीन लीटर दूध डेयरी में जाना चाहिए। हमारे समय में डेयरी नहीं थी और इसी वजह से दूध बच्चों को पिलाया जाता था। दूध से दही बनाया जाता था उसमें से धी बनाया जाता था बाहर की दुनिया से कभी घी घर में नहीं आया। बाहर से कभी भी दूध नहीं लाये। घर में ही दूध जमाओ-दही बनाओ और कढ़ी बनाओ। माताओं को सिखाना चाहिए कि बाहर के दूध और दही का कम प्रयोग करें। आप सभी अपने घरों में बदलाव करें।
एक समय था जब भारत में प्राकृतिक खेती यानी खेती में कोई बाहरी मिलावट नहीं होती थी। जो खेत से मिल रहा है, खेती में जुड़े पशुओं से मिल रहा है, वही तत्व खेती को बढ़ाने के काम में आते थे। खाद हो, कीटनाशक हो, सब कुछ प्राकृतिक तरीके से ही बनते थे, इस्तेमाल होते थे। लेकिन समय के साथ प्राकृतिक खेती का दायरा सिमटता गया, उस पर केमिकल वाली खती हावी होती गई। लेकिन मिट्टी की सुरक्षा के लिये, आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए, अब हमें एक बार फिर प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ना ही होगा। प्राकृतिक खेती में खर्च भी कम होता है उत्पाद भी बढ़ता है। ये खेती का सबसे सस्ता तरीका है, सबसे सुरक्षित तरीका है। आज प्राकृतिक खेती से पैदा हुई फसलों की कीमत भी बहुत ज्यादा है। ये हमारे कृषि सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी बढ़ा कदम है।
आज हमारे विश्वविद्यालय रिकॉर्ड संख्या में वैश्विक रैंकिंग में भी प्रवेश कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अनेक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापरक शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। प्रदेश के दस विश्वविद्यालयों ने नैक मूल्यांकन में ए++. ए+ तथा ए ग्रेड प्राप्त करके प्रदेश का सम्मान बढ़ाया है। इसी प्रकार एन०आई०आर०एफ० में 6 राज्य विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय स्तर पर उच्च रैंकिंग प्राप्त की है। हमारे विश्वविद्यालय का लक्ष्य ‘शिक्षण, शोध और नवीन पद्धतियों के द्वारा ज्ञान के विस्तार के लिए मानव संसाधनों का विकास करना होना चाहिए।
राज्य विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार तथा नई शिक्षा नीति के अनुरूप विश्वविद्यालयों में शोध एवं इंफस्ट्रक्चर के विकास के लिए निरन्तर प्रयास भी हो रहे हैं। यह जो दस विश्वविद्यालयों को ए++, ए+ तथा ए ग्रेड मिला है, तो अभी भारत सरकार की योजना के तहत 740 करोड रूपये यह विश्वविद्यालय को प्राप्त हुआ है। इन पैसों से विश्वविद्यालयों में इन्फास्टेक्चर, शोध, सहयोग आदि होगा। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के अन्तर्गत देश के 26 विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश के 6 राज्य विश्वविद्यालयों, प्रत्येक को सौ करोड़ रूपये की अनुदान धनराशि विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से प्रदान की गयी है। इससे राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के साथ-साथ अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा मिलेगा। प्रिय विद्यार्थियों, अनुशासन एवं आत्मविश्वास से कार्य करने से हर असम्भव कार्य भी सम्भव हो जाता है। इसलिये आप जीवन में हमेशा सकारात्मक एवं सहयोगात्मक सोच रखें। आप सभी को राष्ट्र प्रथम की भावना से कार्य करना है और देश का श्रेष्ठ नागरिक बनना है। आज माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश और प्रदेश की तस्वीर बदल रही है। नया भारत और नया उत्तर प्रदेश बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। नया भारत अपनी वर्तमान पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा देने के लिये ज्यादा से ज्यादा खर्च कर रहा है। बीते दस वर्षों में देश में रिकार्ड संख्या में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज का निर्माण हुआ है।
आज भारत अपने युवाओं के बल पर न केवल आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है, बल्कि तकनीकी, आर्थिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र में दुनिया को एक नया रास्ता दिखा रहा है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर, काशी विश्वनाथ कोरिडोर के विकास के कारण न केवल सांस्कृतिक पुनरूथान, बल्कि पर्यटन, रोजगार सृजन को एक नई ऊंचाई मिल रही है। एक जिला एक उत्पाद के माध्यम से स्थानीय संसाधनों एवं स्वदेशी तकनीकी का विस्तार हो रहा है। मेरा विश्वविद्यालय से आग्रह है कि वे स्थानीय संसाधनों के बेहतर प्रयोग के लिये विकास पर अपना ध्यान अवश्य केन्द्रित करें, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके एवं सतत, विकास के लक्ष्य को समय सीमा में प्राप्त किया जा सके। आज दीक्षा प्राप्ति के साथ ही आपके सामाजिक, नैतिक, मौलिक, अपने देश व धरा के प्रति आपके उत्तरदायित्वों में वृद्धि हुई है। आने वाला समय अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत के विश्व गुरू के रूप में स्थापित होने व विकसित राष्ट्र की साकार होती परिकल्पना के साथ महान परिवर्तन का युग होने वाला है। आपको 2047 तक के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करना है।
मैं आप सभी से यह भी अपेक्षा रखती हूँ कि अपने आस-पास निर्धन या ऐसे बच्चों की भी मदद अवश्य करें, जिन्हें साक्षर होने, स्वस्थ होने, आत्मनिर्भर होने में सहायता की आवश्यकता है। क्योंकि आपके सहयोग से यह बच्चे भविष्य में आपके द्वारा इस प्रज्ज्वलित ज्योति को आगे ले जायेंगे व देश को साक्षर, स्वस्थ व आत्मनिर्भर बनायेंगे। आज कल पूरे उत्तर प्रदेश में यूनिवर्सिटीज, कॉलेज, बैंक आदि द्वारा सीएसआर के माध्यम से लगभग 08 हजार आंगनबाडी में आंगनबाडी संसाधन किट पहुँचाया गया है। यह समाज सहयोग से हुआ है। सरकारी ग्रांट से नहीं लिया गया है। लोग देने के लिए तैयार हैं। मुझे सामने बैठे हुए पूर्व माध्यमिक विद्यालय के नन्हें बच्चों को देखकर अत्यन्त हर्ष का अनुभव हो रहा है। क्योंकि आज इस दीक्षान्त समारोह का एक भाग बनकर इन्हें भी गौरव का अनुभव होने के साथ यह प्रेरणा मिल रही है कि इसी प्रकार निरन्तर पढ़ाई करते रहने से समाज में हम उच्च लक्ष्यों को प्राप्त कर अपने राज्य व देश की सेवा कर सकते हैं। अंत में, मैं उपाधि प्राप्त करने वाले समस्त छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ और माननीय अतिथियों का आभार व्यक्त करती हूँ और फिर से यूनिवर्सिटी के सभी अभिभावकों को बहुत बहुत बधाई देती हूँ।
कार्यक्रम में कुलपति प्रो० (डा) अनिल कुमार श्रीवास्तव, मा० विधायक मांट राजेश चौधरी, विधायक बल्देव पूरन प्रकाश, जिलाधिकारी शैलेन्द्र कुमार सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश कुमार पाण्डेय, मुख्य विकास अधिकारी मनीष मीना, मथुरा वृन्दावन विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष एस.बी. सिंह आदि मौजूद रहे।
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