हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन की कुंज गलियों से लेकर मथुरा के पुराने बाजारों तक उत्पात मचाते बंदरों के वन वास की तैयारी है। श्रद्धालुओं से लेकर स्थानीय वासियों के लिए मुसीबत बन रहे बंदर अब शहर के अंदर नहीं रहेंगे। वर्षों से चली आ रही समस्या के समाधान को पहल करते हुए बंदरों के वन में वास की योजना तैयार की है। इस योजना के तहत इसके प्रथम चरण में 150 हेक्टेयर में फलदार वन विकसित किए जाएंगे। इसके बाद बंदरों को पकड़कर वनों में भेजा जाएगा। कालांतर में कान्हा की नगरी में 137 वन क्षेत्र थे। यहां चहुंओर हरियाली थी। इन वन क्षेत्र में पहले जामुन, बेल, जामुन, अमरूद आदि फलदार पौधे थे। इन जंगलों में बंदर रहकर अपना पेट भरते थे। लेकिन, समय गुजरने के साथ वन क्षेत्र कम होते गए। यही नहीं फलदार पौधों की जगह पर विलायती बबूल समेत कई कांटेदार पौधे भी रोप दिए गए। इसके चलते बंदर वन का वास छोड़कर शहर में आ गए और अब शहरवासियों के लिए मुसीबत बन गए हैं। वन विभाग ने कान्हा की नगरी के कुल 137 वन क्षेत्र में से 37 ऐसे चिह्नित किए हैं, जिनमें विलायती बबूल, यूकेलिप्टिस व कांटेदार पेड़ खड़े हैं। इन वन क्षेत्रों में विलायती बबूल व कांटेदार पेड़ों को काटकर उनके स्थान पर फलदार पौधे लगाए जाएंगे। फल के पौधे लगाने से दो फायदे होंगे। एक तो वन्य जीव जंतुओं, बंदरों को जंगल में ही पेट भरने को फल मिलेंगे, साथ ही कान्हा की नगरी में पुन: वन क्षेत्र जीवंत होंगे। ये काम तीन चरण में होगा। पहले चरण में 150 हेक्टेयर वन क्षेत्र में पौधारोपण किया जाएगा। यहां करीब एक लाख फलदार पौधे रोपे जाएंगे।
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