
महारास महोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद कृष्ण का मंचन कर रहे मुंबई से आए सहयोगी कलाकार ने गोपियों और सखाओं के साथ कार्यक्रम में प्रस्तुति दी। गणेश वंदना के बाद शुरू हुए कार्यक्रम में राधा रानी का भगवान कृष्ण से मिलन लीला का मंचन किया गया।

भगवान कृष्ण वन में अपने सखाओं के साथ खेल रहे होते हैं। इसी दौरान राधा रानी सखियों के साथ वहां दूध दही ले कर जा रही होती हैं, तभी उनकी कृष्ण से मुलाकात होती है। इसी लीला का हेमा मालिनी और उनकी टीम ने मंचन किया।
भगवान कृष्ण और राधा के मिलन की लीला के मंचन के बाद राधा और कृष्ण में आपस में नाराजगी हो जाती है। इसके बाद भगवान कृष्ण राधा रानी को मनाने के लिए मनिहारिन यानी चूड़ी बेचने वाला बनकर आते हैं। सखियों से घिरी राधा रानी को जब चूड़ी दिखाते हैं तब राधा रानी उनको पहचान लेती हैं। इसके बाद दोनों फिर रास करते हैं।

मनिहारिन लीला के मंचन के बाद जवाहर बाग के मंच पर झूला उत्सव लीला का मंचन किया गया। सावन में होने वाली बारिश और उसके कारण हरियाली के बीच राधा रानी बागों में झूला झूलती हैं और कृष्ण उनको झूला झुलाते हैं। इसी लीला का मंचन किया गया। जवाहर बाग के मंच पर राधा रानी का किरदार निभा रहीं हेमा मालिनी झूला झूल रही थीं और कृष्ण स्वरूप में उपस्थित कलाकार उनको झूला झुला रहे थे।

द्वापर युग में राधा रानी और ब्रज की सखियों ने भगवान कृष्ण को पाने के लिए यमुना की बालू से कात्यायनी की पूजा की। इसके बाद मां कात्यायनी ने उनको पूर्णिमा के दिन भगवान के साथ मिलन का वरदान दिया। इसी लीला का मंचन जवाहर बाग में किया गया।

द्वापरयुग में हर गोपी की इच्छा थी कि वह भगवान श्रीकृष्ण के साथ रास रचाए। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने राधा और गोपियों संग शरद पूर्णिमा पर रास रचाया। जितनी गोपियां थीं, कान्हा भी उतने ही थे। इसे ही महारास नाम दिया गया। महारास की आभा ने वक्त को सम्मोहित कर ठहरने को विवश कर दिया। छह माह तक चंद्रदेव (चंद्रमा) अपने स्थान से नहीं हटे।

हेमामालिनी ने महारास की पूरी थीम खुद तैयार की थी। मथुरा में ये उनकी पहली मंचीय प्रस्तुति नहीं है। इससे पहले उन्होंने 2015 और 2018 में छटीकरा, वृंदावन और वेटेरिनरी विश्वविद्यालय में भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया था। सांसद के प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा ने बताया कि हेमामालिनी ने महारास की तैयारी खुद की है।
