हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा के बरसाना में स्थित श्री जी मंदिर में विराजमान राधा रानी अब हीरे से जड़ित सिंहासन में विराजित हो कर भक्तों को दर्शन दे रही हैं । सोने,चांदी और हीरे से जड़ित सिंहासन दिल्ली से मथुरा पहुंच गया है। करीब 6 करोड़ रुपए की लागत से बने इस सिंहासन को दिल्ली के भक्तों के समूह श्री ब्रज हरि संकीर्तन मंडल ने दान किया है। भगवान श्री कृष्ण की अति प्रिय राधा रानी को ब्रज की सरकार कहा जाता है। ब्रजवासी भगवान कृष्ण का नाम लेने से पहले राधा रानी का नाम लेते हैं। मथुरा के बरसाना में राधा रानी का महल है जिसे श्री जी का मंदिर कहा जाता है। ब्रहमांचल पर्वत पर बने इस मंदिर में राधा रानी विराजमान है।
बरसाना के ब्रहमांचल पर्वत पर स्थित राधा रानी के मंदिर में दर्शन करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। राधा रानी के प्रति भक्तों में अटूट श्रद्धा है। भक्तों का मानना है कि भगवान श्री कृष्ण तो ब्रज को छोड़कर चले गए लेकिन राधा रानी आज भी ब्रज में ही वास करती हैं। राधा रानी के प्रति अपनी श्रद्धा और भक्ति जताने के लिए भक्त अपनी क्षमतानुसार दान करते हैं। कोई धन,कोई कपड़े तो कोई उनको सोने चांदी के आभूषण भेंट स्वरूप चढ़ाता है। लेकिन दिल्ली के भक्त मंडल श्री ब्रज हरि संकीर्तन मंडल ने राधा रानी को सोने चांदी और हीरे से जड़ित सिंहासन भेंट किया। जिस पर विराजमान हो कर राधा रानी अपने भक्तों को दर्शन दे रही हैं।

दिल्ली में श्री ब्रज हरि संकीर्तन मंडल द्वारा बनवाया गया यह सिंहासन निजी सुरक्षा कर्मियों की देखरेख में मथुरा के बरसाना पहुंचा। जहां मंदिर प्रबंधन और श्री ब्रज हरि संकीर्तन मंडल के भक्तों द्वारा इसे ब्रहमांचल पर्वत पर बने राधा रानी के मंदिर पर ले जाया गया। मंदिर में पहुंचने के बाद सिंहासन की शुद्धि की गई इसके बाद नव निर्मित सिंहासन में विराजमान हो राधा रानी ने भक्तों को दर्शन दिए। दिल्ली के श्री बृज हरि संकीर्तन मंडल के बब्बू भैया ने हीरा जड़ित 55 किलो चांदी व पांच किलो सोने का सिंहासन राधा रानी मंदिर में भेंट किया। संकीर्तन मंडल के एक सदस्य ने बताया की बब्बू भैया 52 वर्षों से बिना पैसे लिए घरों में भजन कीर्तन का गायन कर रहे हैं। श्री जी की प्रेरणा से उन्होंने राधा रानी के भक्तों से सिंहासन बनवाने के लिए कहा। जिस पर भक्तों का समूह तैयार हो गया।
हीरों से जड़ित स्वर्ण रजत सिंहासन बनबाने का निर्णय लिया गया। सिंहासन को बनबाने के लिए बब्बू भैया ने संकीर्तन मंडल के समक्ष अपनी बात को रखा तो सभी ने सिंहासन बनबाने का निर्णय लिया। जिसके लिए लोगों से चंदा एकत्र कर 55 किलो चांदी, 5 किलो सोने के साथ दस लाख के हीरों से सिंहासन का निर्माण करा कर राधा रानी के चरणों में समर्पित कर दिया । बुधवार की शाम को राधा रानी ने नव निर्मित सिंहासन में विराजमान होकर भक्तों पर दर्शन दिए। वहीं मंदिर को भव्य फूल बंगला से सजाया गया। संकीर्तन मंडल के द्वारा सिंहासन पर राधा रानी के विराजमान होने की खुशी में मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया।मंदिर के रिसीवर संजय गोस्वामी ने बताया कि सिंहासन में वजन होने और सुरक्षा कारणों से प्रतिदिन राधा रानी को इसमें विराजमान कराना सम्भव नहीं है। इस सिंहासन में विशेष उत्सवों में राधा रानी को विराजमान कराया जायेगा जैसे होली,राधा अस्टमी,सावन का महीना आदि। तमिलनाडु के भक्त अन्ना बाबा एवं उनकी पत्नी देवगी राधा रानी की उपासना बहन मानकर करते हैं। बाबा ने एक किलो सोने के जेवर राधा रानी को चढ़ाने का संकल्प लिया था। उसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने रक्षा बंधन पर 2.93 लाख के सोने के आभूषण राधा रानी को भेंट किए थे।
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Author: Vijay Singhal
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