हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृंदावन में बसंत पंचमी के अवसर पर 14 फरवरी को शाहजी मंदिर के ऋतुराज भवन (बसंती कमरा) दो दिन के लिए खुलेगा। इसमें श्रीजी भक्तों को दर्शन देंगी। बसंत पंचमी की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। जहां प्राचीन विदेशी झांड़ फानूसों को साफ करने के साथ ही व्यवस्थित किया जा रह है। वहीं मंदिर को रंग-बिरंगी विद्युत प्रकाश से सजाया जा रहा है। यह तैयारियां पिछले 15 दिनों से अधिक समय से चल रही हैं। मंदिर के सेवाधिकारी शाह प्रशांत कुमार ने बताया कि 14 फरवरी को प्रात: 10 बजे से साढ़े 12 बजे तक शाम छह से देर शाम तक बसंती कमरा खुलेगा। विदेशी झाड़ फानूस की झिलमिल रोशनी के बीच ठाकुरजी के दर्शन होंगे। शाम छह बजे से मंदिर में भजन संख्या का आयोजन होगा। दूसरे दिन 15 फरवरी को शाम छह बजे से देर शाम तक भक्तों के लिए बसंती कमरा में श्रीजी के दर्शनों के लिए खोला जाएगा। वृंदावन का शाहजी मंदिर अद्वितीय स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। लखनऊ के नबावों के करीबी दो ठाकुर राधारमण लाल के भक्त शाह कुंदन लाल और फुंदन लाल ने 1868 में मंदिर का निर्माण कराया था। संगमरमर से बने इस मंदिर में भारतीय, अरेबियन एवं रोमन स्थापत्य कला समाहित है। मंदिर के सेवाधिकारी शाह प्रशांत कुमार ने बताया कि इस मंदिर की नींव दोनों भाइयों ने वर्ष 1860 में बसंती पंचमी के दिन रखी। आठ साल में यह मंदिर बनकर तैयार हुआ। बसंत पंचमी के दिन ही मंदिर में ठाकुर श्रीजी के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा हुई। दोनों भाइयों के आध्यात्मिक नाम ललित किशोरी एवं ललित माधुरी था। जिन्होंने हिंदी, उर्दू और फारसी में पदों की रचना की। वर्ष 1858 में दोनों भाई लखनऊ छोड़कर वृंदावन पांच हजार सेवकों के साथ आए थे। जिन्होंने बसंती कमरा बनवाया इसमें लगे झाड़ फानूस ऑस्ट्रिया, चैकोस्लावाकिया, वेल्जियम से मंगवाए। दोनों भाइयों की ब्रज के प्रति भक्ति इतनी प्रबल थी कि उन्होंने छवि चित्र फर्श पर अंकित कराए। इसके पीछे उनका भाव था कि मंदिर में आने वाले भक्तों के चरणों की ब्रज रज निरंतर मिलती रहे। मंदिर के सेवाधिकारी ने बताया कि शाहजी मंदिर का बसंती कमरा वर्ष में दो बाद खुलता है। जिसमें श्रीजी के दर्शन भक्तों को होते हैं। एक बार बसंत पंचमी के अवसर पर दो दिन और दूसरी बार श्रावण मास में रक्षाबंधन पर्व से दो पहले तृयोदशी तिथि को। बाकी दिनों में ठाकुरजी अपने गर्भगृह में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं।
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Author: Vijay Singhal
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