हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं की याद ताजा कराने वाले जयकुण्ड (स्यांप वाली पोखर) और तुलसी की खेती व कंठी माला का उद्गम स्थल होने के कारण ब्रज का प्रमुख तीर्थ स्थल है जैत।
जयकुण्ड-कालीदह भक्ति पथ अर्थात् बिन्दावन वारौ दगरौ एन एच 19 जैंत से वृन्दावन का पुरातन रास्ता है जो वृन्दावन परिक्रमा मार्ग और कालीदह तक जाता है। जैत और आसपास के क्षेत्रीय ग्रामीण वृन्दावन जाने के लिए इसी रास्ते का प्रयोग करते थे।
मैंने अनुभव किया है कि उत्तर प्रदेश बृज तीर्थ विकास परिषद् जब जब योजनाएं बनाता है, तब तब जैंत की उपेक्षा करता है। चाहे वह माॅडल रोड का प्रस्ताव हो या फिर बृज के मानचित्र और रोप-वे का। सभी में जैंत की उपेक्षा की गई है। आखिर क्यों किया जा रहा है जैंत के साथ सौतेला व्यवहार?
अब तो अपनी सरकार है, सब कुछ अपना है, लखनऊ से दिल्ली तक। जैंत का गौरवशाली इतिहास रहा है। मुगल शासक और ब्रिटिश शासकों ने भी जैंत की प्राचीनता को नष्ट नहीं होने दिया। पुलिस स्टेशन (पुरानी पुलिस चौकी), सहार और बरसाने वारौ दगरौ, शेरगढ़ वारौ दगरौ, राधाकुण्ड वारौ दगरौ (मघेरा मार्ग), बिन्दावन वारौ दगरौ आदि इसके प्रमाण रहे हैं।
जैत ने ऐसा क्या अपराध किया है जिससे उसका पुरातन गौरव छीना जा रहा है। पिछली सरकारों ने जैंत से राधाकुण्ड गोवर्धन मार्ग को छीन लिया। न्याय पंचायत मुख्यालय के साथ साथ उप डाकघर 281402 को छीन लिया। विलुप्त होते जयकुण्ड को द बृज फाउंडेशन ने बचाया तो बृज के पर्यटन मानचित्र से ही जैत को गायब कर दिया? जयकुण्ड की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए हाइवे ऑथोरिटी से जयकुण्ड कट को बन्द करवा दिया, जिससे श्रृद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। जयकुण्ड चौक को बन्द करना जैत के पर्यटन उद्योग की रीढ़ को तोड़ने का षड़यंत्र है।
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