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ब्रज रानी-रज रानी-यमुना महारानी के अनन्य उपासक थे संत बाल गोविन्द दास महाराज : महंत बिहारीदास भक्तमाली

ByVijay Singhal

Feb 7, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। वृन्दावन में श्याम वाटिका/शीतल छाया क्षेत्र स्थित अलि नागरि कुंज में चल रहा ब्रज के प्रख्यात रसिक संत बाल गोविन्द दास महाराज (अलि नागरि) का 18 वां 14 दिवसीय निकुंज प्रवेश तिथि समाराधन महोत्सव अत्यन्त श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ संपन्न हुआ।इसके साथ ही श्रीमद्भक्तमाल की कथा, श्रीमद्भागवत मूलपाठ एवं अखंड श्रीहरिनाम (महामंत्र) संकीर्तन आदि कार्यक्रम भी संपन्न हुए।
इस अवसर पर आयोजित संत विद्वत संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए शरणागति आश्रम,वृन्दावन के महंत बिहारीदास भक्तमाली महाराज ने कहा कि निकुंजवासी बाल गोविन्द दास महाराज (अलि नागरि) श्रीधाम वृन्दावन के रससिद्ध संत थे।वे ब्रज रानी, रज रानी एवं यमुना महारानी के अनन्य उपासक थे।
पूज्य महाराजश्री के परम् कृपापात्र शिष्य पण्डित रामनिवास शुक्ला एवं वरिष्ठ शिक्षाविद पण्डित राजाराम मिश्र ने कहा कि निकुंजवासी बाल गोविन्द दास महाराज (अलि नागरि) अत्यंत सेवाभावी व धर्म परायण संत थे।उन जैसी पुण्यात्माओं से ही पृथ्वी पर धर्म व अध्यात्म का अस्तित्व है।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गोपाल चतुर्वेदी एवं प्रख्यात रासाचार्य स्वामी कुंजबिहारी शर्मा ने कहा कि निकुंजवासी बाल गोविन्द दास महाराज (अलि नागरि) समस्त धर्म ग्रंथों के प्रकांड विद्वान थे।उन्होंने कलाधारी बगीची में रहकर असंख्य बालकों को श्रीमदभागवत, रामायण एवं श्रीमद्भगवतगीता आदि ग्रंथों की निःशुल्क शिक्षा प्रदान की।ऐसे संत अब पृथ्वी पर कहां देखने को मिलते हैं।
संत-विद्वत संगोष्ठी में विद्यानिधि शुक्ला, विद्याधर दास, गौरव शर्मा, डॉ. राधाकांत शर्मा, पूर्व प्राचार्य शिवकुमार गोयल, सुनील दत्त शर्मा, केदार नाथ अग्रवाल (आगरा), राधा बाबा, हरिओम बंसल, सीताराम गर्ग, बंटी मंगल, वेदप्रकाश पंडितजी, बनवारी लाल शर्मा आदि ने भी अपने विचार व्यक्त कर पूज्य महाराज श्री को अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित की।संचालन डॉ. गोपाल चतुर्वेदी ने किया।
इससे पूर्व संतों व भक्तों के द्वारा पूज्य महाराजश्री की प्रतिमा का पञ्चामृत से अभिषेक कर वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य पूजन-अर्चन किया गया।तत्पश्चात प्रख्यात भजन गायक चन्दन महाराज एवं मनमोहन शर्मा ने पूज्य महाराज श्री द्वारा रचित पदों का संगीत की मृदुल स्वर लहरियों के मध्य गायन कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव का समापन संत, ब्रजवासी, वैष्णव सेवा एवं वृहद भंडारे के साथ हुआ।
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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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