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छाता के शाही किले में रह रहे लोगों का तहसील में धरना

ByVijay Singhal

Feb 3, 2024
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। छाता में कस्बे के अकबरी सराय शाही किले में रह रहे लोगों ने शुक्रवार को तहसील परिसर में धरना दिया। ये लोग 30 जनवरी को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम के द्वारा किले को खाली करने की मुनादी से नाराज थे। एसडीएम के समझाने पर दोपहर करीब एक बजे ये लोग मान गए और ज्ञापन देकर चले गए। वहीं दोपहर करीब 3 बजे एएसआई की टीम ने किले का सर्वे किया। पैमाइश, फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी भी की। दरअसल, मुगलकाल में बना अकबरी सराय शाही किला 1986 में राष्ट्रीय स्मारक घोषित हुआ था। वर्तमान में किले के भीतर 5000 से अधिक लोग रह रहे हैं। पट्टे पर रह रहे लोगों के पट्टों का अंतिम बार सन् 1963 में 30 साल के लिए नवीनीकरण किया गया था। 30 जनवरी को एएसआई टीम ने किले में रह रहे लोगों को मुनादी के माध्यम से इस स्थान को खाली करने की जानकारी दी। इससे नाराज बड़ी संख्या में महिलाएं व पुरुष शुक्रवार सुबह तहसील परिसर में एकत्र हो गए।

धरना देकर कहा कि वे 100 साल से अधिक समय से यहां रह रहे हैं। इस स्थान को खाली न कराया जाए। एसडीएम के समझाने पर लोग मान गए और अपने घरों को चले गए। इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ठाकुर फाल्गुन सिंह, व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील पहलवान, दिगंबर चौधरी एडवोकेट, तनवीर आलम खान, ठाकुर मुरारी, ठाकुर वीरी सिंह, ठाकुर त्रिलोकी, सभासद सलमान खान, अख्तर खान, जमील कुरैशी, फखरुद्दीन आदि लोगों ने एक ज्ञापन एसडीएम छाता को दिया। दोपहर करीब 3 बजे एएसआई की टीम ने प्रशासन के अफसरों के साथ किले का सर्वे किया। वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की। कुछ लोगों ने इस दौरान विरोध किया, लेकिन अफसरों और जनप्रतिनिधियों के समझाने के बाद मान गए। सर्वे करने के बाद टीम आगरा लौट गई। वहीं उपजिलाधिकारी श्वेता सिंह व तहसीलदार छाता मनोज वार्ष्णेय द्वारा बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वे टीम ने किले का सर्वे किया है। टीम शासन के निर्देशानुसार निरीक्षण और सर्वेक्षण करने के लिए आई थी। नियमानुसार, सर्वे कराया गया। शेरशाह सूरी ने इस किले का निर्माण कराया था। मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में किले को शाही अकबरी सराय किला के नाम से जाना जाने लगा। दस्तावेजों में भी यही नाम है। किले में दो मुख्य शाही दरवाजे हैं। पूर्व में इसी के भीतर तहसील और थाना कोतवाली व कई बैंकों के भवन थे। इसमें 247 से अधिक भवन हैं। इनके पट्टे सन् 1993 में समाप्त हो चुके हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय धरोहर होने के बाद इसका मालिकाना हक पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसका मूल रकबा 4:3 हेक्टेयर है। सरकारी कार्यालय वर्तमान में यहां से स्थानांतरित हो चुके हैं।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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