धरना देकर कहा कि वे 100 साल से अधिक समय से यहां रह रहे हैं। इस स्थान को खाली न कराया जाए। एसडीएम के समझाने पर लोग मान गए और अपने घरों को चले गए। इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि ठाकुर फाल्गुन सिंह, व्यापार मंडल के अध्यक्ष सुनील पहलवान, दिगंबर चौधरी एडवोकेट, तनवीर आलम खान, ठाकुर मुरारी, ठाकुर वीरी सिंह, ठाकुर त्रिलोकी, सभासद सलमान खान, अख्तर खान, जमील कुरैशी, फखरुद्दीन आदि लोगों ने एक ज्ञापन एसडीएम छाता को दिया। दोपहर करीब 3 बजे एएसआई की टीम ने प्रशासन के अफसरों के साथ किले का सर्वे किया। वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी भी की। कुछ लोगों ने इस दौरान विरोध किया, लेकिन अफसरों और जनप्रतिनिधियों के समझाने के बाद मान गए। सर्वे करने के बाद टीम आगरा लौट गई। वहीं उपजिलाधिकारी श्वेता सिंह व तहसीलदार छाता मनोज वार्ष्णेय द्वारा बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वे टीम ने किले का सर्वे किया है। टीम शासन के निर्देशानुसार निरीक्षण और सर्वेक्षण करने के लिए आई थी। नियमानुसार, सर्वे कराया गया। शेरशाह सूरी ने इस किले का निर्माण कराया था। मुगल बादशाह अकबर के शासनकाल में किले को शाही अकबरी सराय किला के नाम से जाना जाने लगा। दस्तावेजों में भी यही नाम है। किले में दो मुख्य शाही दरवाजे हैं। पूर्व में इसी के भीतर तहसील और थाना कोतवाली व कई बैंकों के भवन थे। इसमें 247 से अधिक भवन हैं। इनके पट्टे सन् 1993 में समाप्त हो चुके हैं। वर्तमान में राष्ट्रीय धरोहर होने के बाद इसका मालिकाना हक पुरातत्व विभाग के अधीन है। इसका मूल रकबा 4:3 हेक्टेयर है। सरकारी कार्यालय वर्तमान में यहां से स्थानांतरित हो चुके हैं।
