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व्रन्दावन में आज भी राधा संग रास-लीला करने आते हैं भगवान कृष्ण, देखने वाले हो जाते हैं पागल

ByVijay Singhal

Nov 8, 2022
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हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल

मथुरा। व्रन्दावन में आज भी कृष्ण भगवान निधिवन में रास लीला करने आते है। रात को सब श्रध्यालुयो को निधिवन से बाहर निकाल दिया जाता है अगर कोई चुपके से रह जाता है पागल हो जाता है। भगवान कृष्ण की नगरी मथुरा में तो वैसे तो आपको हर कदम पर कोई ना कोई मंदिर या दार्शनिक स्थल मिल जाएगा लेकिन मथुरा में एक ऐसी जगह भी है जहां कहा जाता है कि आज भी कृष्ण हर रोज आते हैं। इस जगह से जुड़े रहस्य और चमत्कार दुनियाभर में जाने और माने जाते हैं। इस जगह का नाम है निधिवन। निधिवन कृष्ण भगवान की जन्मस्थली वृंदावन के पास है। कहा जाता है कि निधिवन में भगवान कृष्ण हर रात आते हैं और यहां हर रात रास लीला करते हैं। शाम की आरती के बाद किसी पुजारी या भक्त को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है। खास बात ये है कि निधिवन में शाम 7 बजे के बाद कोई जानवर या पक्षी को नहीं देखा जाता है क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि वो भी इस जगह से भाग जाते हैं। निधिवन की एक और खास बात है और वो ये कि वन असामान्य खोखले पेड़ों से घिरा हुआ है जो कम ऊंचाई पर हैं और शाखाएं नीचे की ओर मुड़ी हुई और उलझी हुई हैं। यहां तुलसी के पौधे भी जोड़े में खड़े होते हैं। ऐसा कहा जाता है कि तुलसी के पौधे रात में गोपियों में बदल जाते हैं और चारों ओर नृत्य करते हैं जबकि कृष्ण अपनी रास लीला करते हैं। रंग महल नामक एक विशेष समर्पित कोने को हर शाम सजाया जाता है। पूरे क्षेत्र में चंदन का एक बिस्तर फैला हुआ है और पानी का एक जार रखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि बिस्तर सुबह इस्तेमाल किया हुआ दिखता है और पान और पानी का स्वाद चखा हुआ लगता है। लोग दावा करते हैं कि भगवान कृष्ण इसको इस्तेमाल करते हैं। रास लीला के बाद राधा और कृष्ण की दावत के लिए महल में प्रसाद रखा जाता है। निधिवन के पास एक कुआं है जिसके बारे में कहा जाता है कि कृष्ण ने राधा की प्यास बुझाने के लिए अपनी बांसुरी से कुएं का निर्माण किया था। कुछ लोगों का ये भी कहना है कि रात में यहां से घुंघरू की आवाज आती है। कहा जाता है कि जिन लोगों ने भी रात के वक्त निधिवन में झांकने की कोशिश की उसे भारी नुकसान हुआ है। या तो उसकी दृष्टि चली गई या फिर उसका मानसिक संतुलन बिगड़ गया। यहां रहने वाले लोग शाम की आरती के बाद अपनी खिड़कियां और दरवाजे बंद कर लेते हैं। यह मिथक है या सच ये कोई नहीं बता सकता। विश्वास और भक्ति पर निर्भर करता है कि इस कहानी पर विश्वास किया जाए या नहीं। हालांकि इस कहानी के कारण दुनिया भर से भक्त दर्शन के लिए निधिवन आते हैं।

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Vijay Singhal
Author: Vijay Singhal

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