हिदुस्तान 24 टीवी न्यूज चीफ विजय सिंघल
मथुरा। व्रन्दावन में अक्षय नवमी पर्व के अवसर पर दक्षिण भारतीय शैली के श्री रंगनाथ मंदिर और मथुरा में पुष्टि मार्गीय संप्रदाय के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में भगवान 56 से ज्यादा तरह के व्यंजन बना कर अर्पित किए गए। उत्तर भारत के विशालतम दक्षिण भारतीय शैली के श्री रंगनाथ मंदिर में कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष नवमी यानी अक्षय नवमी के दिन अन्नकूट उत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर में जैसे ही दर्शन खुले श्रद्धालु भगवान रंगनाथ की जय जयकार करने लगे। श्रद्धालु अन्नकूट के दर्शन कर अपने धन्य महसूस कर रहे थे। अन्नकूट उत्सव के अवसर पर भगवान रंगनाथ का कृष्ण के रूप में श्रृंगार किया गया। भगवान रंगनाथ अपनी कन्नी उंगली पर गोवर्धन पर्वत धारण किए हुए थे तो दाएं हाथ में मुरली धारण की थी। माता गोदा जी के साथ विराजमान भगवान रंगनाथ की शरण में इंद्र शरणागत नजर आए। कामधेनु गाय और एहरावत हाथी भी भगवान के समक्ष खड़े थे।

अन्नकूट उत्सव के लिए मंदिर में तैयारी 7 दिनों से चल रही थी। इस उत्सव में भगवान के बाद अगर सबसे ज्यादा दर्शनीय है तो वह है चावल से बने गोवर्धन पर्वत। रंगनाथ मंदिर में ढाई कुंतल चावल से गोवर्धन पर्वत का स्वरूप बनाया गया। चावल से बने गोवर्धन पर्वत के दर्शन श्रद्धालु अभिभूत हो गए। श्री रंगनाथ मंदिर में करीब ढाई घंटे तक अन्नकूट उत्सव के दर्शन हुए। इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने भगवान को अर्पित किए गए सभी प्रसाद मिश्रण तैयार किया। प्रसाद को मिश्रित करने के बाद उसे मंदिर परिसर में उस समय मौजूद श्रद्धालुओं को कतारवध कर वितरित किया गया। भगवान रंगनाथ का अन्नकूट प्रसाद पाने के लिए श्रद्धालु ललाइत नजर आए। अक्षय नवमी पर्व पर पुष्टि मार्गीय संप्रदाय के प्रसिद्ध द्वारिकाधीश मंदिर में अन्नकूट उत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर में पहले गोवर्धन पूजा की गई। इसके बाद भगवान को अन्नकूट प्रसाद अर्पित किया गया। मंदिर के मुखिया सुधीर कुमार ने पहले विधि विधान से गोवर्धन पूजा की और फिर परिक्रमा दी। अन्नकूट उत्सव के दर्शन करने के लिए

मथुरा वृंदावन से विधायक और पूर्व ऊर्जा मंत्री श्री कांत शर्मा द्वारिकाधीश मंदिर पहुंचे। श्री कांत शर्मा ने भगवान द्वारिकाधीश के समक्ष अर्पित किए गए अन्नकूट के दर्शन किए। इस अवसर पर श्री कांत शर्मा ने कहा कि ब्रज के उत्सवों में अन्नकूट उत्सव प्रमुख उत्सव है। अन्नकूट उत्सव के दौरान भगवान द्वारिकाधीश के दर्शन कर धन्य हो गया।
